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भारतीय चिंतन में है धर्म के माध्यम से प्रकृति को संरक्षित करने का उल्लेख:-डिप्टी सीएम

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में दो दिवसीय पर्यावरण कुंभ का हुआ उद्घाटन, 3000 पर्यावरणविदें ने पर्यावरण को शुद्ध करने पर किया मंथन
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वाराणसी

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Devesh Singh

•

Updated: 1 Dec 2018, 8:21 PM IST

paryavaran kumbh

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वाराणसी. भारतीय चिंतन में ही धर्म के माध्यम से प्रकृति को संरक्षित करने का उल्लेख है। हिन्दू दर्शन व चिंतन में जीवों के संरक्षण की बात कही गयी है। वृक्षों में प्रभु का वास होता है। वृक्षों से मानव व पक्षियों को जीवन मिलता है। यह बात डिप्टी सीएम डा.दिनेश शर्मा ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में देश के पहले दो दिवसीय पर्यावरण कुंभ के उद्घाटन समारोह में शनिवार को बतौर मुख्य अतिथि कही।
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उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म में नारी शक्ति के पूजन की परम्परा है। धरती से लेकर देवलोक में भी नारी को प्रथम व पूज्य स्थान दिया गया है। प्रगति के नाम पर प्र्रकृति का विनाशकारी दोहन रोकना बहुत जरूरी है नहीं जो मानव जाति पर ही संकट आ जायेगा। उन्होने कहा कि पर्यावरण कुंभ से कृषि, वन, जल आदि प्राकृतिक सम्पदा के अनुरक्षण का अमृत रूपी निष्कर्ष प्राप्त हो। इसे कुंभ के प्रसाद के रुप में लिया जायेगा।
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सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने किया था विषपान-सुरेश जी सोनी
समारोह में मुख्य वक्ता व सामाजिक चिंतक सुरेश जी सोनी ने कहा कि समुद्र मंथन के बाद कुभ की परम्परा शुरू हुई। मंथन से निकले विष को भगवान शंकर ने स्वंय पीकर सृष्टि की रचना की थी। हम सभी को मिल कर प्रदूषण रुपी विष को दूर कर प्रकृति की रक्षा करनी होगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति का दोहन उतना ही करे। जितनी आवश्यकता हो। पृथ्वी पर मनुष्य का जितना अधिकार है उतना ही पशु व पक्षियों को भी है।
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घर में लगाये तुलसी का पौधा, शुद्ध होगा वातावरण
अन्ननपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी ने कहा कि जीवन को शुद्ध वायु की बहुत आवश्यकता है। पूरे विश्व में पर्यावरण संकट गहरा रहा है। सभी लोगों को अपने घर में तुलसी का पौधा लगाना चाहिए। इससे वातावरण शुद्ध होगा। राज्यमंत्री डा.नीलकंठ तिवारी ने कहा कि कालांतर से ही कुंभ की परम्परा चली आ रही है। पर्यावरण कुभ का उद्देश्य प्रकृति की रक्षा करना है। वीसी प्रो.टीएन सिंह ने कहा कि कृषि, जल, वायु, भूमि पर जो संकट आया हुआ है उससे प्रकृति पर बड़ा खतरा हो गया है। हम सभी को मिल कर इस खतरे से अपने पर्यावरण की रक्षा करना है। धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डा.साहब लाल मौर्या ने किया।
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डिप्टी सीएम ने किया प्रदर्शनी का अवलोकन
डिप्टी सीएम डा.दिनेश शर्मा ने सबसे पहले पर्यावरण कुंभ में लगायी गयी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। बालू में समुद्र मंथन की छवि देख कर डिप्टी सीएम भी खुश हो गये। प्रदर्शनी देखने के बाद डिप्टी सीएम ने मुख्य समारोह का उद्घाटन किया। पर्यावरण कुंभ का समापन दो दिसम्बर को होगा। समारोह में सीएम योगी आदित्यनाथ के पहुंचने की संभावना है।
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सभी को मिल कर करनी होगी पर्यावरण की रक्षा-लालजी टंडन
बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन ने पर्यावरण व भारतीय जीवन शैली सत्र में कहा कि सभी को मिल कर पर्यावरण की रक्षा करनी होगी। हिन्दू धर्म में अस्थियों को नदियों में प्रवाहित करने का वैज्ञानिक कारण है। अस्थियों संग डाली गयी राख नदियों से कीटाणुओं को खींच कर बहा ले जाती है। हेड ऑफ कम्यूनिअी डेवलपमेंट नई दिल्ली के डा.पुनीत मिश्र ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण के लचते ही युवाओं में डिप्रेशन, नींद नहीं आने की समस्या आदि में वृद्धि हो रही है। बिना मौसम सब्जियों के सेवन से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है। सांसद डा.एसपी गौतम ने कहा कि हमें भोग नहीं योग की तरफ जाना होगा। मौसम वैज्ञानिक डा.लक्ष्मण सिंह राठौर ने कहा कि हिन्दू प्रथा के चार आयाम धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष को आधार मानकर ही भारतीय जीवन शैली को बुना गया है। समारोह के अंत में मंचकला विभाग के छात्र व छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति कर सभी का मनमोह लिया।
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