
मासिक शिवरात्रि
वाराणसी. शिव आराधकों के लिए महाशिवरात्रि का बड़ा महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि को ही भगवान शिव के रूप में प्रकट हुए थे। माना जाता है कि इसी समय ब्रह्मा और विष्णु के द्वारा पहली बार शिवलिंग का पूजन किया गया था। इस बार यह शिवरात्रि 11 जुलाई को मनाई जाएगी। परंतु एक वर्ष में एक महाशिवरात्रि और 11 शिवरात्रियां पड़ती हैं, जिन्हें मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर शिवरात्रि मनाई जाती है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं और शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी, सरस्वती, इंद्राणी, गायत्री, सावित्री, पार्वती और रति ने शिवरात्रि का व्रत किया था और शिव कृपा से अनंत फल प्राप्त किए थे।
पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
शिव की पूजा शुभ मुहूर्त में करने से जीवन की हर संकट का समाधान हो जाता है। साथ ही मान्यता यह भी है कि इस दिन व्रत रखने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की पूजा प्रदोष में की जाती है। प्रदोष काल सूर्यास्त से लेकर मध्य रात्रि के बीच का समय होता है। शिवरात्रि के व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है। विशेष परिस्थिति में फलाहार किया जा सकता है। शिवरात्रि की पूजा का फल तभी मिलता है जब शिव का विधिपूर्वक रुद्राभिषेक किया जाता है।
रुद्राभिषेक
रुद्राभिषेक प्रदोष काल में करने से ही मनोवांछित फल मिलता है। इस दिन भगवान शिव के ध्यान के लिए विशेष रुप से भगवान शिव के सामने बैठकर ध्यान किया जाता है। शिव पूजा के लिए शिव पुराण, शिव पंचाक्षर, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा, शिव रुद्राष्टक और शिव श्लोक का पाठ किया जाता है। इसके साथ ही विशेष पूजा विधि अपनाकर भगवान शिव का पूजन किया जाता है। साथ ही इस दिन शिव को बेलपत्र और बेर चढ़ाने से हर मनोकामना पूरी होती है। इस बार मासिक शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त 15 जनवरी को रात्रि के 12 बजकर 09 मिनट से लेकर अगले दिन दोपहर 1 बजकर 02 मिनट तक है।
Published on:
7 Jul 2018, 1:59 PM IST
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