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मारीशस में बनाया अनोखा राम मंदिर, विश्व स्तर पर जगायेंगे रामायण की अलख

युवा पीढ़ी को जोडऩे के लिए पाठ्यक्रम में शामिल हो पवित्र ग्रंथ, जानिए क्या है कहानी
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वाराणसी

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Devesh Singh

•

Updated: 4 Dec 2017, 5:00 PM IST

मारीशस में बने राम मंदिर की जानकारी देते संस्था के सचिव

मारीशस में बने राम मंदिर की जानकारी देते संस्था के सचिव

वाराणसी. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर सियासी तुफान मचा हुआ है। मंदिर निर्माण प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और वहां के निर्णय के अनुसार ही आगे का काम होगा। मारीशस में बसे भारतीयों ने हृदय में बसे प्रभु राम को वहां बने मंदिर में स्थापित कर दिया है और अब रामायाण व रामचरित मानस की विश्व में अलख जगाने के लिए राम संदेश दे रहे हैं। सोमवार को पराड़कर भवन में संस्था के सदस्यों ने राम संदेश को लेकर किये जा रहे प्रचार व प्रचार की जानकारी दी।
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संस्था के पंडित राजेन्द्र अरूण उनकी पत्नी डा.वीनू पाठक व अजय सिंह ने बताया कि मारीशस में बना राम मंदिर बेहद खास है और वह सभी भारतीयों से अपील करते हैं कि जब भी मारीशस आये तो प्रभु श्रीराम के मंदिर का दर्शन अवश्य करे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भारतीयों को मारीशस ले जाकर प्रताडि़त किया था। भारतीयों का सुख-चैन तो छीन लिया गया था लेकिन हृदय से प्रभु श्री राम का प्रेम नहीं खत्म कर पाये। आजादी के बाद मारीशस में ही भारतीय बस गये हैं और उनकी संख्या सबसे अधिक है। नयी पीढ़ी को प्रभु श्रीराम से जोडऩे के लिए मारीशस में राम मंदिर के निर्माण की योजना बनायी गयी। इसके बाद मारीशस की संसद ने इस प्रस्ताव का पास किया और डेढ़ बीघा जमीन में भव्य राम मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर के साथ धर्म के प्रचार व प्रचार के लिए भी वहां पर कई सेंटर बनाये गये हैं और वहां पर अन्य देवी व देवाताओं की प्रतिमा स्थापित की गयी है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जब मारीशस आये तो मंदिर में जाकर प्रभु श्रीराम का दर्शन किया था।
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पाठ्यक्रम में शामिल किया जाये रामयाण व रामचरित मानस
संस्था के सदस्यों ने कहा कि भारत के पाठ्यक्रम में रामायाण व रामचरित मानस का अधिक से अधिक हिस्सा शामिल किया जाये। इससे युवा पीढ़ी को प्रभु श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने का मौका मिल पायेगा। संस्था के सदस्य काशी के बाद इलाहाबाद व अन्य शहरों में जाकर मारीशस में बने राम मंदिर की जानकारी देने के साथ ही रामायण व रामचरित मानस का अधिक से अधिक प्रचार करेंगे।
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