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सुपारी किंग मुन्ना बजरंगी मौत के बाद इस सबसे बड़े मामले में हुआ बरी, मनोज सिन्हा को लगा बड़ा झटका

बीजेपी विधायक सहित छह लोगों की AK-47 से 400 गोलियां दाग कर की गयी थी हत्या, मुलायम सरकार में हुए इस हत्याकांड से यूपी में आया था सियासी तूफान
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 3 Jul 2019, 4:17 PM IST

Munna Bajrangi

Munna Bajrangi

वाराणसी. सुपारी किंग मुन्ना बजरंगी अपनी मौत के बाद सबसे बड़े मुकदमे से बरी हो गया है। बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या की गयी थी। यूपी में सुपारी किंग के नाम से फेमस रहे मुन्ना बजरंगी पर यूपी की सबसे बड़े हत्याकांड में से एक में शामिल होने का आरोप लगा था। बीजेपी विधायक सहित छह लोगों की AK-47 से ताबड़तोड़ 400 गोलियां मार कर हत्या कर दी गयी थी। यूपी में उस समय मुलायम सिंह यादव की सरकार थी और इस मर्डर के बाद प्रदेश में सियासी तूफान आ गया था। यूपी के पूर्व सीएम राजनाथ सिंह ने बनारस के जिला मुख्यालय पर दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर कई दिनों तक धरना दिया था जिसमे बीजेपी के वरिष्ठ नेता भी शामिल थे।
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बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय अपने छह साथियों पूर्व ब्लाक प्रमुख श्यामाशंकर राय, रमेश राय, अखिलेश राय, शेषनाथ पटेल, मुन्ना यादव व उनके अंगरक्षक निर्भय नारायण उपाध्याय के साथ 29 नवम्बर 2005 को भांवरकोल ब्लाक के सियाड़ी गांव में एक क्रिकेट प्रतियोगिता का उद्घाटन करने जा रहे थे। बीजेपी विधायक का काफिला अभी कोटवा माग्र के पास पहुंचा था कि कुछ बदमाशों ने AK-47 एंव अन्य स्वचालित हथियारों से बस्ट फायरिंग कर दी थी। करीब 400 राउंड गोलियां चलायी गयी थी। एक साथ इतनी अधिक असलहों से फायरिंग की गयी थी कि बीजेपी विधायक व उनके लोगों को जवाब देने का भी मौका नहीं मिल पाया था। मौके पर ही बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय समेत छह लोगों की मौत हो गयी थी। इस जघन्य हत्याकांड में बाहुबली मुख्तार अंसारी, सुपारी किंग मुन्ना बजरंगी, संजीव माहेश्वरी, एजाजुल हक, अफजाल अंसारी, रामु मल्लाह आदि लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले की जांच सीबीआई को सौपी गयी थी लेकिन सीबीआई इस मामले में आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने में नाकामयाब रही और दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने सभी आरोपी को बरी कर दिया। मुन्ना बजंरगी की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य आरोपी रहे लोगों के लिए कोर्ट का निर्णय बड़ा राहत लेकर आया है। मुन्ना बजरंगी हत्याकांड में ही बाहुबली मुख्तार अंसारी लंबे समय से जेल में बंद है।
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गाजीपुर के पूर्व सांसद मनोज सिन्हा को लगा सबसे बड़ा झटका
गाजीपुर के पूर्व सांसद मनोज सिन्हा को कोर्ट के फैसले से सबसे बड़ा झटका लग गया है। बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय के करीबी माने जाने वाले मनोज सिन्हा लगातार इस मुकदमे की पैरवी कर रहे थे। बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय व गाजीपुर के पूर्व सांसद मनोज सिन्हा ही इस केस की पैरवी कर रहे थे लेकिन आरोपियों को सजा नहीं दिला पाये।
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