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भाजपा सरकार के खिलाफ लामबंद हुए किसान, हक नहीं मिला तो 2019 में देंगे EVM से जवाब

जमीन से फसल के लागत मूल्य तक की होगी लड़ाई। ईंट से ईंट बजाने का ऐलान।
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वाराणसी

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Ajay Chaturvedi

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Updated: 24 Jan 2018, 12:55 PM IST

वाराणसी के किसानों की बैठक

वाराणसी के किसानों की बैठक

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र और आसपास के इलाकों के किसान लगातार नए-नए तरीके से लामंबंद हो रहे हैं। किसानों के एक तबके ने पहले अपना खुद का उत्पाद खुद ही उपभोक्ता तक पहुंचाने की तैयारी की। अब वो अपने मकसद में काफी हद तक सफल हो चुके है। उनके उत्पाद अपेक्षाकृत किफायती दर पर उपभोक्ताओं को उपलब्ध हैं। इसके बाद अभ एक अन्य तबका तैयार हुआ है जिसने अपने हक के लिए शासन-प्रशासन की ईंट से ईंट बजा देने का फैसला किया है। ये केवल अपने उत्पाद के लिए मार्केट और लागत मूल्य की ही बात नहीं कर रहे बल्कि इन्होंने अपनी कृषि योग्य जमीन की रक्षा के लिए भी संघर्ष का फैसला किया है। इसका ताना-बाना बुना जा चुका है। चरणबद्ध आंदोलन होना है। इसकी रणनीति तैयार कर ली गई है।

इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता राज कुमार गुप्ता ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि वर्तमान में सबसे बड़ा संकट यह है कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इसके पीछे बड़ी साजिश काम कर रही है। पूंजीपति अढ़तिए बाजार में पैदावार आते ही दाम इतने कम कर देते हैं कि किसान अपना उत्पाद सड़कों पर फेंकने को मजबूर हो जाता है। किसान अगर इस शिकंजे से निकल जाएं तो उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर अनाज के भंडारण की व्यवस्था और उसे सही कीमत पर बेचने की सुविधा सुनिश्चित करनी होग। साथ ही सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र को स्पेशल एग्रीकल्चर जोन (SAZ) बनाकर क्षेत्र के किसानों को मुख्यधारा में लाने के लिए संघर्ष किया जाएगा।

बताया कि किसानों की मांग है कि पूर्वांचल को विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाए या उत्तर प्रदेश का बंटवारा हो। किसान हर हाल में अपनी फसल की लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य तय कराने को दृढ़ है। किसानों का कहना है कि इस बार मांगें नहीं मानीं तो भाजपा को आगामी चुनाव में नहीं देंगे वोट। आलम यह है कि किसानहित का नारा दे कर सत्ता में आने वाली सरकार की गलत नीतियों के चलते आलू किसान खून के आंसूं रो रहे हैं। ऐसे में अब किसानों ने आंदोलन की रणनीति बना ली है।

किसान जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि संतोष कुमार पटेल ने कहा कि इस यूनियन के बनने से अब ज्यादा तेजी के साथ किसानों के हक की लड़ाई लड़ी जाएगी। इसके तहत किसानों की जिन जमीन को पूर्व सरकार ने कौड़ियों के भाव से अधिगृहीत कर लिया था उस जमीन को सरकार से बातचीत का रास्ता निकाल कर किसानों को वापस दिलाने का प्रयास किया जाएगा। किसान अब भूमि अधिग्रहण समेत किसानों के सभी मुद्दों पर आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। इसके लिए यूनियन के सदस्य गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे, ताकि हर किसान अपने हक की लड़ाई लड़ने को तैयार हो सके। यूनियन ने स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू किए जाने की भी मांग की।

जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि शीतला यादव कहा कि गन्ना, धान, गेहूं, आलू व सब्जी आदि की फसल पूरी तरह पिट गई है। किसान कर्ज में डूब रहे हैं या जमीन बेचकर बच्चों की शादी आदि कर रहे हैं। केंद्र सरकार को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि इस सरकार मे किसानों की आवाज को पूरी तरह दबा दिया जा रहा है। पहले अंग्रेजों ने किसानों को लूटा, उसके बाद देश में बनी सभी दलों की सरकारों ने किसानों को लूटा। जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि योगीराज सिंह पटेल ने कहा कि यूनियन की मांग है कि सरकार किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों को लागत का दो गुना मूल्य मिलना चाहिए। पीएम मोदी ने जो घोषणा की और जो वादा किया उसे ही वे लागू करें। वीरेंद्र यादव ने कहाकि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों की बदहाली दूर करने का वादा किया था। कैबिनेट की पहली बैठक में ही आलू का समर्थन घोषित करने के साथ ही सरकार द्वारा आलू खरीदने का ऐलान किया था. लेकिन इस घोषणा का जमीनी स्तर पर कोई पालन नहीं हुआ। नतीजतन किसानों को सैकड़ों बोरे आलू सड़कों पर फेंकना पड़ा।


किसानों का कहना है कि आलू से उतना भी पैसा नहीं मिल रहा जिससे कोल्ड स्टोरेज में रखने के लिए एक बोरी खरीदी जा सके। यह कितनी बड़ी विडंबना है कि एक बोरी बचाने के लिए किसान आलू फेंक दे रहे हैं। सरकार की नीतियों से किसान परेशान हैं। इस मुद्दे पर हुई बैठक में किसानों ने यह सवाल भी खड़ा किया किजब सिफारिशें लागू नहीं होतीं, तो आयोग बनाए ही क्यों जाते हैं? फसलों के लागत-मूल्य का डेढ़ गुना अधिक समर्थन मूल्य तय करने के अलावा किसानों से जुड़े कई अन्य मसलों पर भी चर्चा हुई और आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। तय हुआ कि किसान आंदोलन तेज करने के पहले 11 फरवरी से एक दिवसीय किसान सायकिल यात्रा सेवापुरी विधान सभा मे शुरू की जाएगी।

चरणबद्ध आंदोलन की रूप रेखा
5 मार्च से लेकर 15 मार्च तक गांव गांव में निकलेगी किसान पदयात्रा

18 मार्च को राजातालाब में किसान युवा संसद आयोजित किया जाएगा

इस बैठक में जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि योगीराज सिंह पटेल, वीरेंद्र यादव, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि संतोष कुमार पटेल, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि शीतला यादव, सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता, राधेश्याम पटेल, विवेक पटेल, दिनेश विश्वकर्मा, जित्तू राम, गणेश शर्मा, विनोद कुमार आदि मौजूद रहे। संचालन जिला पंचायत सदस्य रमेश उर्फ गुड्डू तिवारी ने किया।

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