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अखिलेश व मायावती के गठबंधन कर असर, पीएम नरेन्द्र मोदी दो जगहों से लड़ सकते हैं चुनाव

लोकसभा चुनाव में पीएम की सीट के लिए संघ ने भी मोर्चा संभाला, पीएम मोदी की सीट भी तय करेगी चुनाव की दिशा
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 10 May 2018, 5:21 PM IST

PM Narendra Modi

PM Narendra Modi

वाराणसी. अखिलेश व मायावती के गठबंधन का असर है कि पीएम नरेन्द्र मोदी दो सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं। इसको लेकर जमीनी स्तर पर तैयारी तेज कर दी गयी है। बीजेपी जानती है कि दिल्ली की सत्ता पर फिर से कब्जा जमाना है तो पीएम मोदी का ही चुनाव जीताने में मुख्य भूमिका निभानी होगी। पीएम की दो सीटों को लेकर तैयारी तेज हो गयी है और संघ ने भी मोर्चा संभाल लिया है।
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संसदीय चुनाव2019 में पीएम नरेन्द्र मोदी की सीट सबसे महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। वर्तमान समय पीएम मोदी बनारस सीट से सांसद है। पीएम मोदी को चुनाव हराने के लिए अखिलेश यादव व मायातवी की पार्टी ने गठबंधन कर लिया है और इस बात की प्रबल संभावना है कि कांग्रेस, आप पार्टी व बीजेपी के विरोधी अन्य दल भी इस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। ऐसा होने पर पीएम मोदी की मुश्किले बढ़ सकती है। बीजेपी को चुनाव में तभी सबसे ज्यादा फायदा होता है जब विरोधी दल अलग होकर चुनाव लड़ते हैं ऐसे में मुस्लिम एंव अन्य मतदाताओं के वोट बिखर जाते हैं और बीजेपी को फायदा हो जाता है लेकिन इस बार ऐसी स्थिति होने की संभावना बहुत कम है वोटों को विभाजन नहीं होगा तो बीजेपी की राह कठिन हो सकती है यह कहानी बनारस सीट पर भी लागू हो सकती है। ऐसे में पीएम नरेन्द्र मोदी को दो सीटों पर चुनाव लड़ाने की तैयारी की गयी है। बीजेपी ने अधिकृत रुप से पीएम मोदी की सीट को लेकर कुछ नहीं कहा है लेकिन संघ ने अपने स्तर से तैयारी शुरू कर दी है।
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इन दो सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं पीएम नरेन्द्र मोदी
पीएम नरेन्द्र मोदी बनारस के अतिरिक्त वड़ोदरा संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था और दोनों ही जगहों पर लाखों वोट से चुनाव जीत कर अपना डंका बजाया था उसके बाद पीएम मोदी ने वड़ोदरा सीट को छोड़ कर बनारस के सांसद बन गये थे। इस बार भी पीएम नरेन्द्र मोदी वड़ोदरा व बनारस संसदीय सीट से चुनाव लडऩे की तैयारी में है। बनारस सीट पर महागठबंधन का असर दिखायी पड़ सकता है लेकिन वड़ोदरा सीट पर ऐसा कोई गठबंधन नहीं है इसलिए पीएम मोदी को चुनाव जीतने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। पीएम मोदी की जो लोकप्रियता है उससे वह आसानी से दोनों सीटों पर चुनाव जीत सकते हैं और उसके बाद किस सीट को अपने पास रखेंगे। इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है।
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खास रणनीति के तहत ही पीएम मोदी लड़ेंगे दो लोकसभा सीट से चुनाव
पीएम नरेन्द्र मोदी खास रणनीति के तहत ही दो लोकसभा सीट पर से चुनाव लड़ सकते हैं। बनारस में चुनाव लडऩे का फायदा यूपी से लेकर बिहार तक होगा। गुजरात को पीएम नरेन्द्र मोदी का गढ़ कहा जाता है और जब से पीएम मोदी गुजरात से दूर हुए हैं वहां पर बीजेपी कमजोर हो गयी है। पीएम मोदी एक बार फिर से गुजरात की सीट चुनते हैं तो वहां पर बीजेपी को अधिक से अधिक संसदीय सीट जीताने में आसानी होगी। यदि महागठबंधन के चलते यूपी में बीजेपी से कुछ सीटे कम हो जाती है तो उस कमी को गुजरात से दूर करने की योजना है। पीएम मोदी अगर बनारस सीट से चुनाव नहीं लड़ते हैं तो बीजेपी को बड़ा झटका लगेगा। संदेश जायेगा कि पीएम मोदी ने बनारस का विकास नहीं किया है इसलिए वह सीट छोड़ कर जा रहे है इसका पूरा फायदा बीजेपी के विरोधी दल उठायेंगे। ऐसे में पीएम मोदी किसी हाल में बनारस सीट से भी चुनाव लड़ेंगे। भले ही चुनाव जीतने के बाद गुजरात की सीट को ही अपने पास रखे।
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संसदीय चुनाव 2014 में पीएम मोदी को मिले थे इतने वोट
संसदीय चुनाव वर्ष 2014 में गुजरात के सीएम नरेन्द्र मोदी ने बनारस के साथ वड़ोदरा सीट से चुनाव जीता था बनारस में पीएम मोदी ने 3 लाख 71 हजार से अधिक वोटों से अरिवंद केजरीवाल को चुनाव में शिकस्त दी थी जबकि वड़ोदरा सीट पर पीएम मोदी ने पांच लाख 70 हजार से अधिक वोटों से चुनाव जीता था। दोनों ही सीटों पर चुनाव प्रचार के लिए पीएम मोदी बहुत कम गये थे इसके बाद भी क्षेत्र की जनता ने उन्हें चुनाव जीता दिया था। इस बार भी पीएम मोदी की दो सीटों से चुनाव लडऩे की संभावना को देखते हुए संघ ने कार्यकर्ताओं को कमर कस लेने को कहा है।
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