
PM Narendra Modi
वाराणसी. पीएम नरेन्द्र मोदी के गोद लिए गांव को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। गांव की स्थिति को सुधारने के लिए ही पीएम मोदी ने वर्ष 2014 से अब तक चार गांव को गोद लिया है लेकिन गोद लिए गांव में सांसद निधि से एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया है। जबकि पीएम ने खुद सभी सांसदों से गांव गोद लेकर उसकी स्थिति सुधारने की अपील की थी।
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कन्नौज के कटरा, छिबरामऊ निवासी अनुज वर्मा ने सूचना के अधिकार के तहत तीन बिन्दुओं पर सूचना मांगी थी। पहले बिन्दु में वर्ष 2014 से पीएम द्वार गोद लिए गांव की जानकारी, दूसरे बिन्दु में गांव गोद लिए जाने की तिथि व तीसरे बिन्दु में गोद लिए गांव में सांसद निधि से खर्च की गयी धनराशि का ब्यौरा मांगा गया था। सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी में साफ लिखा है कि पीएम नरेन्द्र मोदी ने 7 नवम्बर 2011 को जयापुर, 16 फरवरी 2016 को नागेपुर, 23 अक्टूबर 2017 को ककहरिया व 6 मार्च 2018 को डोमरी गांव को गोद लिया था लेकिन गोद लिए गांव में सांसद निधि से कोई कार्य नहीं कराया गया है। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, वाराणसी के परियोजना निदेशक के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश से साफ हो जाता है कि पीएम ने अब तक चार गांव को गोद लिया है लेकिन गोद लिए गांव में सांसद निधि से एक भी पैसा खर्च नहीं किया है।
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गोद लिए गांव में कराया गया है विकास कार्य
पीएम नरेन्द्र मोदी ने गोद लिए गांव में विकास कार्य कराये है। इसके लिए ISR फंड का उपयोग किया गया है। नागेपुर में400 से अधिक शौचायल, दो यात्री प्रतीक्षालय, एक नंद घर, पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए टंकी, अम्बेडकर पार्क, 50 से अधिक परिवारों के लिए पीएम आवास योजना के तहत आवास की व्यवस्था की गयी है। पीएम मोदी ने अपने गोद लिए गांव में सांसद निधि का उपयोग नहीं किया है लेकिन अन्य मद से विकास कार्य कराये हैं।
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बीजेपी सांसदों ने नहीं दिखायी थी गांव गोद लेने में रुचि
बीजेपी सांसदों ने गांव को गोद लेने में रुचि नहीं दिखायी थी। अधिकांश सांसदों ने गांव को गोद ही नहीं लिया था यदि लिया भी था तो विकास कार्य नहीं कराये गये। इसके चलते गांव की स्थिति आज भी बहुत बदली नहीं है। सूचना का अधिकार के तहत मिले जवाब से साफ हो जाता है कि पीएम मोदी ने गोद लिए गांव में सांसद निधि का उपयोग नहीं किया है।
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Published on:
18 Jul 2018, 4:33 PM IST
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