स्वामी विवेकानंद के बाद काशी के इस युवा विद्वान को मिला शिकागो के मंच से दुनिया को संबोधित करने का मौका

स्वामी विवेकानंद के बाद काशी के इस युवा विद्वान को मिला शिकागो के मंच से दुनिया को संबोधित करने का मौका

Ajay Chaturvedi | Publish: Sep, 11 2018 11:35:33 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

चौबेपुर के हैं मूल निवासी, बीएचयू में हैं प्रोफेसर।

वाराणसी. काशी को यूं ही सर्व विद्या की राजधानी नहीं कहा गया है। यहां की मिट्टी में कुछ ऐसा है जो कहीं और नहीं। फिर बात महानमना पंडित मदन मोहन मालवीय की तपस्थली काशी हिंदू विश्वविद्यालय की तो पूछना ही क्या। तभी तो इस विश्वविद्यालय को ऐसा एक मौका मिला है जिसके जरिए यह भारत के नाम एक और ताज जोड़ेगा। दरअसल आज से सवा सौ साल पहले की दास्तां दोहराने का मौका मिला है काशी को, बीएचयू को।

125 साल पहले स्वामी विवेकानंद ने दुनिया को किया था संबोधित

सवा सौ साल पहले की कहानी दोहराने बनारस के युवा विद्वान पहुंचे हैं अमेरिका के शहर शिकागो। वह उसी मंच से दुनिया को संबोधित करेंगे जहां आज ही के दिन यानी 11 सितंबर को स्वामी विवेकानंद ने दुनिया को भारतीय दर्शन, संस्कृति, परंपरा और मानवता का पाठ पढ़ाया था। बता दें कि 11 सितंबर स्वामी विवेकानंद के उस संबोधन की 125वी सालगिरह है।

भारत अध्ययन केंद्र से जुड़े हैं प्रो उपाध्याय

यह युवक और कोई नहीं बल्कि मूल रूप से वाराणसी के चौबेपुर थानान्‍तर्गत अजांव गांव के निवासी प्रो राकेश उपाध्याय हैं। वह फिलहाल बनारस हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय के भारत अध्‍ययन केंद्र से जुड़े हैं। केंद्र के सेंटेनरी चेयर पद पर कार्यरत प्रो उपाध्याय को द ओरिएंटल इंस्टीट्यूट, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में आयोजित 'वर्ल्ड कांग्रेस ऑन वैदिक फाउंडेशन ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज' विषयक चार दिवसीय सम्मेलन में वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है।

शिकागो यूनिवर्सिटी में है यह आयोजन

इसका आयोजन शिकागो यूनिवर्सिटी में स्वामी विवेकानंद के विश्व प्रसिद्ध 'शिकागो संबोधन के 125 साल पूरे होने की याद में 11 से 15 सितंबर 2018 के बीच किया गया है। प्रो. उपाध्याय भारत की राजधानी दिल्ली से नौ सितंबर को ही शिकागो के लिए रवाना हो चुके हैं। बीएचयू से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी पांच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसमें इंडियन मैनेजमेंट थॉट प्रमुख हैं। साथ ही उनके दो शोधपत्र हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय रिसर्च मैग्‍जीन, 'द नेचर' में भी प्रकाशित हुए हैं। वह पत्रकारिता से भी जुड़े रहे हैं।

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