
बैठक करते पदाधिकारी, Pc-Patrika
Ram mandir controversy: अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में कथित चंदा चोरी विवाद को लेकर वाराणसी में काशी विद्वत परिषद ने बैठक की है। इस दौरान विद्वानों ने सरकार से कई मांग की है। काशी विद्वत परिषद ने कहा है कि देश के प्रसिद्ध मंदिरों का सरकारीकरण रुकना चाहिए, जबकि जो बड़े मंदिर हैं, उन्हें आर्थिक रूप से छोटे मंदिरों की मदद करनी चाहिए। इसके साथ ही जो दान मंदिरों को मिल रहे हैं, उनका उचित उपयोग करते हुए हिंदुओं के कल्याण के लिए कार्य किया जाना चाहिए।
वाराणसी में काशी विद्वत परिषद और धर्माचार्यों ने बैठक कर मंदिरों के सरकारीकरण पर रोक लगाने की मांग की है। विद्वानों ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर, तिरुपति समेत कई बड़े मंदिरों को छोड़कर बाकियों का सरकारीकरण न किया जाए। विद्वत परिषद के महामंत्री प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि मंदिरों को दिया जाने वाला दान हिंदू भाई बहनों के काम आना चाहिए। इसके साथ ही पारंपरिक शास्त्रों में संप्रदाय और मठ मंदिरों की व्यवस्था को लागू किए जाने की भी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी विधर्मी को सनातन धर्म के बारे में प्रश्न उठाने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने अखिल भारतीय मंदिर प्रबंधन जैसी कई संस्थाओं के गठन की जरूरत बताई है।
बैठक में श्री हिंदू फाउंडेशन के संयोजक डॉक्टर कौशल कांत मिश्रा ने कहा कि मंदिर में दिया गया दान सर्व समाज की भलाई के लिए काम आना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में जो अधिकार दिए गए हैं, उनकी व्याख्या करके विद्वत समाज के सामने रखना है और मंदिरों का प्रबंध सनातनियों के हाथ में सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में जितने भी मंदिर हैं, उनमें पूजा-पाठ इत्यादि की व्यवस्था सनातनियों के हाथ में सौंपे जाने चाहिए और कर्मकांड अपने-अपने संप्रदाय और परंपराओं के अनुसार किए जाने चाहिए।
डॉ मिश्रा ने कहा कि शंकराचार्य और काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में मंदिरों में काम किया जाना चाहिए, ताकि मंदिर समाज का केंद्र बनें। मंदिरों से गौशाला, अस्पताल, गुरुकुल आदि संचालित किए जाएं, ताकि इसका लाभ आम जनमानस को मिल सके। इसके साथ ही मंदिरों में मिलने वाले चंदे को लेकर एक निगरानी कमेटी का भी गठन किया जाना चाहिए, ताकि उनमें हेर फेर की संभावना न रहे। बैठक की अध्यक्षता कर रहे महर्षि सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठानम के अध्यक्ष प्रोफेसर हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि वेदों में सनातन जीवन पद्धति और प्रबंधन दोनों का उल्लेख किया गया है। वेद और शास्त्र भारत की आत्मा है। हमें वेदों के अनुसार अपनी परंपरा का निर्वाह करना चाहिए।
Updated on:
17 Jun 2026 08:58 am
Published on:
17 Jun 2026 08:58 am
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