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इस चुनाव में हुआ गजब, गढ़ में सपा ने सपा को ही हराया

हार के डर से भगवा सेना ने नहीं लड़ा चुनाव, जानिए क्या है कहानी
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 27 Dec 2017, 7:49 PM IST

Samajwadi Party

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वाराणसी. आम तौर पर सपा का कांग्रेस व बसपा से मुकाबला होता है और इन्ही प्रमुख दल से किसी को विजय मिलती है, लेकिन एक चुनाव ऐसा भी हुआ है जहां पर सपा ने सपा को ही हरा कर विजय हासिल की है। भगवा सेना ने हार के डर से प्रत्याशी नहीं उतारे थे और पहली बार यहां पर सपा के दो विंग ने एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था जिसमे एक विंग ने पार्टी के दूसरे विंग को पटखनी दी।
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हरिश्चन्द्र पीजी कालेज को सपा को गढ़ माना जाता है यहां पर सपा के अधिकृत या फिर बागी प्रत्याशी अधिक चुनाव जीतते आये हैं। पिछली बार यहां पर एबीवीपी की अध्यक्ष पद पर छात्रा प्रत्याशी खुशबू सिंह ने चुनाव जीत कर रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में एबवीपी को छात्रसंघ चुनाव में जबरदस्त हार मिली थी जिसके बाद बीजेपी के एक मंत्री पर ही टिकट वितरण को लेकर सवाल उठने लगे थे। चुनाव में हार के डर से भगवा सेना इतना डर गयी थी कि उसने हरिश्चन्द्र पीजी कालेज में प्रत्याशी ही नहीं उतारे थे। कालेज में समाजवादी छात्रसभा व समाजवादी युवजन सभा ने अपने पैनल घोषित किया था और चुनाव परिणाम आने पर समाजवादी छात्रसभा के पैनल ने चुनाव जीत कर समाजवादी युवजन सभा को बड़ा झटका दिया है। छात्रसभा के अभिषेक यादव ने समाजवादी युवजन सभा के नीरज कुमार चौबे को चुनाव हराया। इसी क्रम में छात्रसभा के उपाध्यक्ष प्रत्याशी मुकेश यादव ने निशांत श्रीवास्तव, महामंत्री प्रत्याशी पवन कुमार यादव ने सूरज पटेल व पुस्तकालय मंत्री पद के प्रत्याशी अरशद राईन ने युवजन सभा के विशाल कन्नौजिया को पटखनी दी है।
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सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में नहीं मिली जीत तो होगी बड़ी किरकिरी
सपा के छात्र विंग ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के बाद हरिश्चन्द्र पीजी कालेज छात्रसंघ पर अपना कब्जा कर लिया है जबकि यूपी कालेज में हुए छात्रसंघ चुनाव मेें किसी दल के बैनर तले प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ते हैं। एबीवीपी के पास अब सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में होने वाले छात्रसंघ चुनाव में विजयी पताका फहरानी होगी। एबीवीपी ऐसा नहीं कर पाती है तो पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में भगवा पार्टी की जबरदस्त किरकिरी होना तय है।
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