
साइबर फ्रॉड करने वाले 6 शातिर को गिरफ्तार (फोटो- पत्रिका)
Cyber Criminals Arrested in Varanasi: वाराणसी साइबर क्राइम पुलिस ने ऑपरेशन मूल स्ट्राइक के तहत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। साइबर सेल व 4 थानों की संयुक्त कार्रवाई में 6 म्यूल अकाउंट धारकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि इन म्यूल अकाउंट से जुड़ी 51 शिकायतें एनसीआरपी पोर्टल पर लोगों ने दर्ज कराई थी और करीब 2 करोड़ 42 लाख रुपए से अधिक की साइबर ठगी की गई थी।
जानकारी के मुताबिक, ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक के तहत वाराणसी साइबर क्राइम सेल व थाना साइबर सेल (सिगरा, भेलूपुर, चेतगंज व चोलापुर) ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए म्यूल खाता धारकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस दौरान 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। डीसीपी नीतू कादयान ने बताया कि भारत सरकार के एनसीआरपी पोर्टल पर इस संबंध में और म्यूल खातों के खिलाफ 51 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिसके बाद मामले में पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू की। इन म्यूल खातों में जमा 2,42,89,752 रुपए की धनराशि को फ्रिज कराया गया है।
डीसीपी नीतू कादयान बताया कि म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है, जिसका उपयोग साइबर अपराधी अवैध रूप से प्राप्त धनराशि को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने, छुपाने और निकालने के लिए करते हैं। ऐसे खाते स्वयं खाताधारक द्वारा जानबूझकर उपलब्ध कराया जा सकते हैं, या फिर लालच, कमीशन, नौकरी के झांसे में साइबर अपराधियों के नियंत्रण में आ जाते हैं। डीसीपी ने बताया कि इस मामले में उननैश, अजीत कुमार पटेल, आरिफ जमाल, आशीष कुमार गोंड, सत्यम यादव और शुभम सिंह को गिरफ्तार किया गया है।
डीसीपी ने बताया कि मोहम्मद उननैश के खिलाफ 43 शिकायतें, जबकि अजीत के खिलाफ 4, आरिफ जमाल के खिलाफ एक, आशीष के खिलाफ दो, सत्यम यादव के खिलाफ एक शिकायत दर्ज थी। वहीं, शुभम सिंह खाता खुलवाकर उसे खाते का विवरण रखा करता था। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा धनराशि भी उननैश के खाते से बरामद हुई है। पुलिस के मुताबिक, 2,19,27,1152 उसके खाते में फ्रॉड करके रखा गया था, जिन में से 2.3 करोड़ रुपया फ्रीज कर दिया गया है।
पुलिस के मुताबिक, इन खाता धारकों से संबंधित कुल 32 खाते भी पुलिस की जांच में सामने आए हैं, जिनके खिलाफ अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने बताया कि पकड़े गए आरोपी पैसे को सीधे अपने खाते में न मंगा कर विभिन्न व्यक्तियों के खाते में ट्रांसफर करवाते थे। इसके साथ ही धनराशि को एक नया अकाउंट से दूसरे में अकाउंट में कई बार भेजा जाता था, जिससे जांच एजेंसी के लिए धन के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना कठिन हो जाता था। इन पैसों की निकासी एटीएम, यूपीआई, क्रिप्टो करेंसी, गिफ्ट कार्ड के माध्यम से की जाती थी। पुलिस ने बताया है कि इस गिरोह से संबंधित अन्य व्यक्तियों की तलाश भी की जा रही है।
Published on:
20 Jun 2026 05:40 pm
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