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सावधान! आपकी सेहत के लिए खतरा न बन जाए मिलावटी मिठाई
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सावधान! आपकी सेहत के लिए खतरा न बन जाए मिलावटी मिठाई

मिठाइयां देख-परख कर लें, उच्च गुणवत्ता वाली दुकान से खरीदें मिठाइयां खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा लिए सेम्पल की नहीं मिलती समय पर जांच रिपोर्ट
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अजमेर

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Chandra Prakash Joshi

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Updated: 11 Oct 2019, 8:30 AM IST

इस्लाम में नहीं गौ हत्या का जिक्र, मॉब लिचिंग कहीं नहीं देश मेंअजमेर. त्योहार के मौके पर मिलावटी एवं खराब गुणवत्ता वाली मिठाइयां आपकी सेहत के लिए खतरा साबित हो सकती है। बाजार में मिलने वाली मिठाइयों एवं खाद्य पदार्थों में गुणवत्ता के मानक कई जगह खरे नहीं उतर रहे हैं। मिठाई, देशी घी, मावा आदि उन्हीं प्रतिष्ठानों से खरीदें, जहां अच्छी गुणवत्ता की खाद्य सामग्री मिले। पहले जांच करें फिर खरीद करें। इसकी वजह यह भी है कि त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच ही समय पर नहीं आ पाती है।

अजमेर शहर सहित जिलेभर में दीपावली के त्योहार को लेकर मिठाइयों, देशी घी, तेल आदि की खरीद तेज होने लगी है। होलसेल दुकानों से खुदरा विक्रेता के साथ आमजन भी खरीद कर रहे हैं, मगर इसकी गुणवत्ता की जांच आप अपने स्तर पर भी करें। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के माध्यम से लिए जाने वाले नमूनों की जांच 15 दिन से लेकर एक महीने के मध्य आती है। ऐसे में दीपावली की मिठाई के सेम्पल की जांच भी त्यौहार के बाद ही आने की संभावना है।

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पिछली दीपावली से पूर्व लिए 64 सेम्पल, 9 मिलावटी व कम गुणवत्ता

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की ओर से विगत वर्ष दीपावली से पूर्व मिठाइयों, देशी घी, तेल, नमकीन आदि के 64 नमूने लिए गए। इनमें से 6 सब स्टैंडर्ड के पाए गए, 1 मिस ब्रांड एवं 2 अनसेफ (हानिकारक) पाए गए। इनमें से 5 प्रकरण कोर्ट में विचाराधीन हैं, जबकि शेष द्वितीय अनुसंधान के लिए लैब में जांच को भेजे गए हैं।

इनमें पाई गई थी मिलावट

– खोया बर्फी, रसगुल्ला (पैकिंग डिब्बा), गुलाब जामुन, खोया (फीका मावा), रिफाइंड तेल में मिलावट पाई गई।

इस तरह करते हैं मिलावट

फीका मावा में उबले आलू, मैदा की मिलावट, रिफाइंड तेल में पामोलिन तेल, बेसन व नमकीन में मटर आदि के आटे की मिलावट करते हैं। यही नहीं दूध में वनस्पति घी मिलाकर उसे जमा दिया जाता है और फिर घी बनाकर देशी घी के रूप में बेच दिया जाता है।

इस वर्ष अब तक 21 सेम्पल

इस वर्ष दीपावली से पूर्व गुरुवार तक 21 सेम्पल लिए गए हैं। इनमें फीका मावा, देशी घी, रसगुल्ला, कलाकंद, आगरा का पेठा, मावा बर्फी के सेम्पल लिए गए हैं। इन सेम्पल को प्रयोगशाला में भिजवाया गया है। जिनकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है, और आगामी 15 दिनों तक भी रिपोर्ट आना मुश्किल है।

हाईक्लास तकनीक का अभाव
खाद्य पदार्थों के नमूने लेने के साथ ही तत्काल या एक-दो दिन में जांच की हाईक्लास तकनीक का अभाव है। अजमेर में इस तरह की तकनीक व मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। यही वजह है कि त्योहार पूर्व लिए गए मिठाइयों व खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच रिपोर्ट कई दिन बाद मिल पाती है।

क्या कहते हैं खाद्य सुरक्षा अधिकारी

खाद्य पदार्थ का नमूना 24 घंटे के भीतर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजना आवश्यक होता है। तुरंत जांच रिपोर्ट नहीं मिल पाती है। कई बार पुन: जांच के लिए नमूने भेजने पड़ते हैं। फीका मावा में आलू, स्टार्च, मैदा आदि मिलना पाया गया है। देशी घी में पॉम ऑयल की कुछ लोग मिलावट कर देते हैं।

– रमेशचंद सैनी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी

एक्सपर्ट व्यू
खाद्य पदार्थों, मिठाइयों के नमूने लेने के चलते व्यापारियों व दुकानदारों में भय बना रहता है। किसी तरह की मिलावट की स्थिति एवं नमूनों की रिपोर्ट में खुलासा होने पर उनमें व्यापार कम होने तथा पैठ खराब होने का भी भय बना रहता है। हालांकि यह तो विभागीय कार्यवाही है, मगर आमजन को भी सावधानी रखना आवश्यक है। हाथ ठेलों व रेड़ी में बिकने वाला मावा, मिठाई या खाद्य पदार्थ नहीं खरीदें। किसी स्थायी व गुणवत्ता वाले सामान वाली दुकान से खाद्य पदार्थ खरीदें। यूरिया व सिंथेटिक दूध स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है, रंग-बिरंगी मिठाइयों में लोकल रंग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

डॉ. के. के. सोनी, सीएमएचओ