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धारा 377 के फैसले  के बाद  क्या कहना है विधी विशेषज्ञों  और वकीलों  का… देखिए वीडियो
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धारा 377 के फैसले के बाद क्या कहना है विधी विशेषज्ञों और वकीलों का… देखिए वीडियो

धारा 377 के फैसले के बाद क्या कहना है विधी विशेषज्ञों और वकीलों का... देखिए वीडियो
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जयपुर

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Sumeet Sharma

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Updated: 6 Sep 2018, 6:42 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध करार देनेवाली भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को निरस्त कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के ही 2013 के दो सदस्यीय बेंच के फैसले को निरस्त कर दिया है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हर व्यक्ति की अपनी पहचान है। व्यक्तिगत पहचान के बिना मौत है। समाज अब व्यक्तिगत पहचान के लिए तैयार है। हमारा समाज तभी स्वतंत्र होगा जब हम समाज के इन तबकों को भी अपने में शामिल करेंगे। अब हमें सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के लिए काम करना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 मनमाना है। कोर्ट ने कहा कि एलजीबीटी समुदाय को भी आम लोगों की तरह अधिकार है। उनकी गरिमा का उल्लंघन करने का किसी को अधिकार नहीं है