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प्रतिष्ठा की सीट रहेगी सांगानेर, असली मुकाबला तिवाड़ी-आहूजा
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प्रतिष्ठा की सीट रहेगी सांगानेर, असली मुकाबला तिवाड़ी-आहूजा

भाजपा से बागी होकर ज्ञानदेव आहूजा ने निर्दलीय के रूप में सांगानेर के लिए नामांकन अंतिम दिन दाखिल किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि सांगानेर में चुनाव रोचक रहेगा। विस्मयकारी रहेगा। सांगानेर प्रतिष्ठा की सीट रहेगी।
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जयपुर

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Surendra Kumar Samaria

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Updated: 21 Nov 2018, 4:50 PM IST

भाजपा से बागी होकर ज्ञानदेव आहूजा ने निर्दलीय के रूप में सांगानेर के लिए नामांकन अंतिम दिन दाखिल किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि सांगानेर में चुनाव रोचक रहेगा। विस्मयकारी रहेगा। सांगानेर प्रतिष्ठा की सीट रहेगी। यहां पर भाजपा और कांग्रेस तो तीसरे और चौथे नंबर पर रहेगी। असली मुकाबला भारत वाहिनी पार्टी के घनश्याम तिवाड़ी और मेरे बीच ही होगा। मैंने आज तक पार्टी विरोधी कोई बयान नहीं दिया है। हमेशा गौरक्षा, हिंदुत्व हित, राष्ट्रहित, हिंदु समाज हित में स्टेटमेंट दिया है। मैं विवाद की कोई भी बात नहीं कहता।
सांगानेर से चुनाव लडऩे का निर्णय अचानक हुआ। क्योंकि मेरे मकान, मेरे भतीजे का मकान है। काफी समय यहीं रहा। अचानक प्रदेशाध्यक्ष मदन लाल सैनी के सामने सांगानेर मुंह से निकल गया है। क्योंकि कामां से 10 दिन में टिकट लेकर चुनाव नहीं लड़ा जाता। समाज के लोगों ने भी निर्णय लिया, उन्होंने कहा कि अगर टिकट मिलता है तो ठीक नहीं तो निर्दलीय लड़ो।

बिना वजह काटा टिकट
विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने पार्टी से इस्तीफा देने के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सांगानेर सीट से पर्चा भरा। उन्होंने बताया कि पार्टी ने उन्हें रामगढ़ से टिकट नहीं दिया। कोई कारण भी नहीं बताया गया। पार्टी ने उन्हें भरतपुर जिले से प्रत्याशी बनाने का आश्वासन दिया लेकिन यहां से भी किसी सीट से टिकट नहीं दिया। ऐसे में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लडऩे का फैसला किया है।

अशोक लाहोटी ने जब आहुजा के छूए पैर
सांगानेर सीट से चुनाव लडऩे के लिए भाजपा प्रत्याशी अशोक लाहोटी ने अपना भी 19 नवंबर को नामांकन भरा। इसी सीट से भाजपा से बागी होकर ज्ञानदेव आहुजा ने भी नामांकन भरा है। नामांकन भरने के दौरान लाहोटी ने ज्ञानदेव आहुजा को देखते हुए उनके पैर छुए और आर्शीवाद भी लिया। लेकिन इस सीट से फिलहाल दोनों ही चुनावी मैदान में हैं। नामांकन भरने के दौरान सिविल लाइन्स सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी प्रताप सिंह खाचरियावास ने अशोक लाहोटी को देखने रूके और फिर कुछ मिनट तक लाहोटी और खाचरिवास ने एक दूसरे से हंसी मजाक करते हुए बातचीत की।