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अच्छे फैसले हमेशा नजीर बने रहते हैं: जस्टिस माथुर
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अच्छे फैसले हमेशा नजीर बने रहते हैं: जस्टिस माथुर

पढि़ए : राजस्थान और गुजरात उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एन एन माथुर से मुलाकात देखिए : पत्रिका टीवी पर पत्रिका मंच कार्यक्रम में शनिवार रात 8.30 और रविवार रात 10.30 बजे
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जोधपुर

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MI Zahir

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Updated: 11 Aug 2018, 4:52 PM IST

जोधपुर. अपने फैसलों से न्यायिक सजगता का परिचय देने वाले राजस्थान और गुजरात उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एन एन माथुर का मानना है कि मानवाधिकार के नजरिये से दिए गए अच्छे फैसले देश और दुनिया में हर जगह हमेशा नजीर के रूप में पेश किए जाते हैं। उन्होंने राजस्थान पत्रिका से खास मुलाकात में यह बात कही। जस्टिस माथुर ने कहा कि आजकल हर चीज इंटरनेट पर मौजूद है तो यह पता चल जाता है कि कौनसा फैसला दूसरे केसों में दृष्टांत के रूप में पेश किया जा रहा है। किस विश्वविद्यालय में विधि शिक्षा व रिसर्च में कौनसे फैसले को अधिक कोट किया जा रहा है। ऐसे फैसले और ये लाइक्स न्यायपालिका के इतिहास में संगे मील की हैसियत रखते हैं।

जज पद पर रहते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस न करें
सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के सवाल पर कहा कि अदालत की बात अदालत के अंदर ही होना चाहिए। जो कोई मुख्य न्यायाधीश होता है, यह उसका संवैधानिक अधिकारहोता है कि वह यह निर्धारित करे कि कौनसे मामले की किसे सुनवाई करनी है। इसलिए ऐसे मामलों को तूल नहीं देना चाहिए। जजों की निय़ुक्ति का कॉलेजियम सिस्टम जजों की निय़ुक्ति का कॉलेजियम सिस्टम सही है। इस सिस्टम के कारण नियुक्तियों में राजनीतिक पक्षधरता की कोई गुुंजाइश नहीं रहती है। यह न्यायाधीशों की नियुक्ति का एकदम तटस्थ और पारदर्शी तरीका है।

मानवाधिकार के नजरिये से दिया गया फैसला अहम
अपने सबसे पसंदीदा और अहम फैसले के सवाल पर उन्होंने बतायाकि गुजरात उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहते हुए शरणार्थी इराकी भाइयों खैतर अब्बास का फैसला जीवन का सबसे अहम फैसला रहा। वो समंदर के रास्ते देश में आए थे और उन्हें देश से बाहर भेजने की दलील दी जा रही थी। उन भाइयों का कहना था कि वहां उनकी जान को खतरा है और वो वापस वहां नहीं जाना चाहते। इस केस का भारत के मूल और मौलिक अधिकार के साथ-साथ मानवाधिकार को ध्यान में रखते हुए फैसला दिया गया। मानवाधिकार के नजरिये से दिए गए फैसले के कारण उन्हें भारत में रहने का अधिकार मिला।

अफसरों को डांटना गलत, केस समझना चाहिए
उन्होंने कहा कि सीधे जनता और विकास से जुड़े मामलों में चीफ सेक्रेटरी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी या और किसी उच्चाधिकारी को बुला कर डांट-डपट करने के बजाय उन्हें या उनके अधीनस्थ को चैम्बर में बुला कर उनसे समस्या के बारे में विचार विमर्श करने के बाद फैसला देना सही रहता है। मैंने यह तरीका अपनाया और इसके बहुत अच्छे परिणाम सामने आए। क्योंं कि विषय का अच्छी तरह से अध्ययन करने के बाद दिए गए आदेश की अवमानना नहीं होती, आराम से पालना ही होती है।

झीलों के किनारे निर्माण पर रोक के अच्छे परिणाम
उन्होंने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय में रहते हुए एक फैसले में झील संरक्षण समिति बनाने का आदेश दिया था। फैसले में यह बताया गया था कि उदयपुर मेें झीलों के किनारे अवैध निर्माण पर रोक लगाने के फैसले के कालांतर में अच्छे परिणाम सामने आए। वहां फतेहसागर के किनारे आबादी नहीं बस सकी और अवैध निर्माण को मंजूरी नहीं मिली। इस कारण वहां अवैध निर्माण नहीं हुए और झील का सौंदर्य भी बना रहा। इसी तरह एक फैसले में यह बताया था कि नाडी की जमीन पर अतिक्रमण नहीं कर सकते।

जोधपुर का विकास हुआ
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री दिल्ली में भारी वाहनों के लिए पृथक व्यवस्था कर पेरिफेरियल रोड बनाने की बात कह रहे हैं। मैंने राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहते हुए जोधपुर में सर्कुलर रोड बनाने की बात कही थी। इससे जोधपुर में भारी वाहनों का प्रवेश रुका और शहर का विकास हुआ। यह दूरगामी फैसला था।

जोधपुर का राष्ट्रीय विधि विवि सबसे अलग
राष्ट्रीय विधि विवि के पूर्व कुलपति जस्टिस एन एन माथुर ने कहा कि जोधपुर के राष्ट्रीय विधि विवि और दूसरे विश्वविद्यालयों में मूलभूत अंतर यह है कि वहां दिन रात केवल पढ़ाई होती है। वहां कोई शिलान्यास या उद्घाटन नहीं होता है। इस विश्वविद्यालय पर यूजीसी या किसी विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है। हर काम में पारदर्शिता रखी जाती है।

जस्टिस एन एन माथुर : एक नजर
जस्टिस एन एन माथुर ने विधायिका को कर्तव्य याद दिलाने और सक्रिय करने और रखने में भूमिका निभाई है। उन्होंने राइट टु इन्फॉर्मेशन पर किताब भी लिखी है। जस्टिस माथुर को रिटायर हुए 11 साल हो गए हैं, लेकिन उनके दिए गए फैसले आज भी देश विदेश की अदालतों और रिसर्च में नजीर के रूप में पेश किए जाते हैं। आज भी कई अफसर उन्हें और उनके फैसले याद करते हैं और इसी वजह से बतौर न्यायिक सजगता विशेषज्ञ , उन्हें अपने कार्यक्रमों में बुलाते हैं।