
कोटा. राजस्थान और मध्यप्रदेश में दिसम्बर में होने वाले विधानसभा चुनावों में नहरी पानी को लेकर किसान आंदोलित नहीं हों, इसलिए दोनों राज्यों की सहमति से निर्धारित से दस दिन पहले ही चम्बल की दाईं मुख्य नहर में शुक्रवार को जल प्रवाह शुरू कर दिया गया। सुबह 7 बजे 500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। शाम को जल प्रवाह बढ़ाकर तीन हजार क्यूसेक कर दिया गया। मध्यप्रदेश की सीमा पार्वती एक्वाडक्ट पर पानी पहुंचने में तीन दिन लगेंगे।
पिछले दिनों दोनों राज्यों के जल संसाधन और सीएडी के अधिकारियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में 20 अक्टूबर के बाद पानी छोडऩे का निर्णय किया गया था। पानी छोडऩे से पहले नहरों की सफाई का काम पूरा करना था, लेकिन ज्यादातर नहरों, माइनरों और धोरों की अभी तक सफाई नहीं हुई। किसानों का कहना है कि नहरों की सफाई नहीं होने से टेल क्षेत्र तक कैसे पानी पहुंचेगा। दाईं मुख्य नहर में जल प्रवाह शुरू करने के बाद सीएडी अधिकारियों ने नहरों का दौराकर जल प्रवाह की स्थिति की जांच की।
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140 दिन सिंचाई का पानी
गांधी सागर व राणा प्रताप सागर बांध में कुल पानी 2.722778 एमएएफ है। इसमें से वाष्पीकरण एवं पेयजल के लिए रिजर्व को छोड़कर रबी में सिंचाई के लिए 2.269578 एमएएफ पानी उपलब्ध है। उपलब्ध पानी सिंचाई के लिए चम्बल की दाईं और बाईं मुख्य नहरों में 140 दिन जल प्रवाह किया जाएगा। सीएडी अधिकारी पहले ही कह चुके हैं कि बांधों में सिंचाई के लिए पानी कम उपलब्ध है। इसके चलते किसान कम सिंचाई वाली फसलों की बुवाई करें।
फैक्ट फाइल
125309 हैक्टेयर दाईं मुख्य नहर
100220 हैक्टेयर दाईं मुख्य नहर
98.48 प्रतिशत सिंचाई सघनता
9 लिफ्ट परियोजनाएं कार्यशील
19059 जमीन लिफ्ट परियोजना से सिंचित