
कोटा. रेल संपत्ति की रक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारी, पर्यवेक्षक और कर्मचारी हर माह मोटा वेतन लेने के बाद भी अपनी जिम्मेदारी किस तरह निभा रहे हैं, यह जानने के लिए सोगरिया स्टेशन के पास हो रहा अवैध कब्जा काफी है।
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कोटा-बीना रेलवे लाइन पर स्थित सोगरिया स्टेशन के पास रेलवे की भूमि को चिह्नित करने के लिए रेलवे ने पिलर लगा रखे हैं, जिस पर इंडियन रेलवे लिखा है, ये पिलर रेलवे की संपत्ति होने का ***** है और अतिक्रमण रोकने के लिए लगाए हैं, लेकिन अतिक्रमियों ने इन्हें अपने कब्जे में ले लिया है।
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यहां रेलवे की करोड़ों की जमीन पर अतिक्रमण करके खेती की जा रही है। रेलवे संपत्ति को चिह्नित करने वाले पिलर फसल के बीच में खड़े दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं अतिक्रमी ने रेलवे की जमीन पर तारबंदी करके अपने अधिकार में ले लिया है। यहां पर खेती के लिए लाइसेंस लेने का भी कोई बोर्ड लगा हुआ नहीं था, इस पर रेलकर्मियों से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि खेती के लिए किसी तरह की अनुमति नहीं दी गई है। यहां पर रोज इंजीनियङ्क्षरग विभाग के कर्मचारी गश्त भी करते हैं और स्टेशन के निर्माणाधीन भवन का मौका देखने इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी भी आते हैं। शुक्रवार को जोनल स्तर और मंडल स्तर के अधिकारियों ने महाप्रबंधक के साथ सोगरिया स्टेशन का निरीक्षण किया, लेकिन रेल भूमि पर हो रहे अतिक्रमण की ओर उनका ध्यान नहीं गया।
सोगरिया स्टेशन पर इन दिनों यात्री सुविधाएं विकसित शुरू करने का काम चल रहा है। यहां स्टेशन का नया भवन भी निर्माधीन है, निकट भविष्य में इस स्टेशन से ट्रेनों का परिचालन शुरू होने वाला है। स्टेशन से ट्रेनों का परिचालन शुरू होने से पहले ही स्टेशन के आसपास रेलवे की भूमि पर अतिक्रमियों की नजर है। सोगरिया स्टेशन पर नया प्लेटफॉर्म बनाने काम भी चल रहा है।
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इतनी भूमि पर है अतिक्रमण
देशभर में रेलवे की 4.77 लाख हैक्टेयर भूमि से 844.38 हैक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण है, जो कुल भूमि का 0.18 प्रतिशत है। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा, भोपाल और जबलपुर मंडल में करीब 34.75 हैक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण है। सबसे ज्यादा अतिक्रमण उत्तर में रेलवे की 202.93 हैक्टेयर भूमि पर है। सबसे कम अतिक्रमण पूर्व मध्य रेलवे में 1.99 हैक्टेयर भूमि पर है। अतिक्रमण को लेकर रेलवे का यह तर्क है कि हर साल अतिक्रमण रोकने के लिए सर्वेक्षण कराया जाता है और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती हैं, जब भी यह हाल है। दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर कई जगह खेती के नाम पर रेलभूमि पर अतिक्रमण हो रहा है।
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ऐसे रोका जा सकता है
अतिक्रमण रोकने लिए रेलवे के पास चारदीवारी करने, पौधरोपण करने और बाड़ लगाने के अलावा यहां यात्री सुविधाएं विकसित करने का विकल्प खुला हुआ है।