
कोटा. कोटा के रियासतकालीन चिडयि़ाघर की इकलौती शान बाघिन महक को आधी रात में कोटा से छीनकर जयपुर शिफ्ट कर दिया गया। वन विभाग के अफसर बाघिन गौरी को छीनने के बाद पिछले दो साल से महक को जयपुर शिफ्ट करने की कोशिशों में जुटे थे। जिसे सोमवार रात के अंधेरे में अंजाम दे दिया गया। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के आबाद होने के बाद महक का जाना कोटा के पर्यटन जगत के लिए तगड़ा झटका होगा।
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कोटा का रियासतकालीन चिडिय़ाघर केन्द्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण(सीजेडएआई) के मापदण्डों पर खरा नहीं उतरता। इसका आकार काफी छोटा है, वहीं इसमें वन्यजीवों के बाड़े भी छोटे हैं। इन स्थितियों के चलते प्राधिकरण चिडिय़ाघर को स्थाई मान्यता नहीं देता। कोटा में प्रस्तावित बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण होने तक सीजेडएआई कोटा जू की अस्थाई मान्यता बढ़ाता रहा है, लेकिन 27 साल बाद भी बायोलॉजिकल पार्क धरातल पर उतरता ना देश इस बार सीजेडएआई चिडयि़ाघर की मान्यता बढ़ाने के लिए तैयार नहीं हो रहा। सूत्रोंं के मुताबिक अथॉरिटी ने जयपुर समेत दूसरे चिडय़ाघरों को निर्देश दिए थे कि वह कोटा के चिडय़ाघर से जानवरों की शिफ्टिंग के लिए तैयारी कर लें।
आधी रात को दिया अंजाम
सोमवार रात करीब 11.30 बजे वन विभाग के अफसरों ने बाघिन महक को चिडिय़ाघर से जयपुर शिफ्ट कर दिया। महक को जयपुर छोडऩे के लिए कोटा के ही वन विभाग के अफसर जयपुर गए हैं। सूत्रों के मुताबिक महक को जयपुर शिफ्ट करने का फैसला कई दिन पहले हो चुका था, लेकिन दो साल से वन्य जीव प्रेमी इस कोशिश का लगातार विरोध कर रहे थे जिसे देखते हुए आचार संहिता लगने का इंतजार किया जा रहा था। जैसे ही रविवार को आचार संहिता लगी सोमवार को रात में महक को जयपुर शिफ्ट कर दिया गया। किसी को कानोंकान खबर न लगे और किसी तरह के विरोध का सामना न करना पड़े इसलिए वन विभाग के अफसरों ने रात का वक्त चुना।
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दो साल से हो रही कवायद
वर्ष 2003 में जयपुर के चिडयि़ाघर में जन्मी बाघिन महक को आठ साल पहले कोटा के चिडयि़ाघर में लाया गया था। यहां दो बाघों शत्रुघन और मछन्दर के साथ महक का जोड़ा बनाया गया था, लेकिन दोनों की शत्रुघन की वर्ष 2012 और मछन्दर की वर्ष 2016 में मौत होने के बाद महक अकेली पड़ गई। इसके बाद कभी कोटा में ही महक का जोड़ा बनाने तो कभी जयपुर शिफ्ट करने की कवायदें चलती रही। सूत्रों के मुताबिक उसे जयपुर केनाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया जाएगा। महक की घर वापसी के लिए नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में विशेष तैयारियां की गई हैं। जबकि कोटा के वन्य जीव प्रेमियों की मांग थी कि महक को छीनने के बजाय कोटा में ही उसका जोड़ा बनाया जाए।
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2016 में जुदा हुई थी गौरी
मान्यता के संकट से जूझ रहे कोटा जू को तीन साल पहले इकलौती शेरनी गौरी से भी हाथ धोना पड़ा था। सीजेडएआई ने बेहद गुपचुप तरीके से 20 अक्टूबर 2016 के दिन गौरी को कोटा से जोधपुर के चिडयि़ाघर भेज दिया था। जिसके बाद कोटा के चिडयि़ाघर में महक इकलौती बाघिन बची थी।
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बायोलॉजिकल पार्क का इंतजार
सरकार की नांता अभेड़ा क्षेत्र में बायोलॉजिकल पार्क बनाने की योजना है। यह योजना करीब 27 वर्षों से कागजों में दौड़ रही है। क्षेत्र में निगम का ट्रेंचिंग ग्राउण्ड होने से बायोलॉजिकल पार्क आकार नहीं ले सका। पिछले दिनों सीजेडए ने सुझावों के साथ अभेड़ा में चिडिय़ाघर बनाने को स्वीकृति दी थी, लेकिन यहां अभी तक केज बनाने का काम भी पूरा नहीं हो सका।
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सीजेडएआइ की शर्तों के मुताबिक किसी भी बाघ या बाघिन को अकेले नहीं छोड़ सकते। महक को जोड़ा बनाने के लिए जयपुर शिफ्ट किया गया है। जब कोटा में बायोलॉजिकल पार्क बन जाएगा तो महक को या फिर उसके बच्चे हुए तो उन्हें वापस लेकर आने की कोशिश करेंगे।
सुनील चिदरी, उप वन संरक्षक, वन्य जीव