
वाराणसी. टैक्स चोरी करने के लिए व्यापारी एक से बढ़ कर एक उपाय करते रहते हैं। ऐसे ही एक व्यापारी मैक्रोनी व पास्ता बेचता था लेकिन बिली सेवई की ब्रिकी का देता था। व्यापारी ने टैक्स चोरी करके करोड़ों रुपये की सम्पत्ति जमा कर ली थी। वाणिज्यकर विभाग को जब इस बात की सूचना मिली तो छापा मारा गया। छापे में ढाई करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी गयी है। विभाग ने फैक्टी को भी सीज कर दिया है।
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वाणिज्यकर विभाग ने गोपनीय सूचना के आधार पर करखियांव एग्रो इंडस्ट्री के आरडी उद्योग में छापा मारा। टीम के पहुंचते ही वहां पर हड़कंप मच गया। इसके बाद टीम के सदस्यों ने वहां पर जांच शुरू कर दी। विभिन्न दस्तावेज को खंगालने के बाद ही वाणिज्यकर विभाग की टीम ने टैक्स में चोरी पकड़ी। टीम ने देखा कि यहां पर भारी मात्रा में पास्ता व मैक्रोनी तैयार किया जाता था जिसकी यूपी के साथ अन्य राज्यों में भी सप्लाई थी। व्यापारी एक तरफ मैक्रोनी व पास्ता भेजता था तो दूसरी तरफ सेवई का बिल काटता था। टीम के सदस्यों ने घंटों की छानबीन के बाद ढाई करोड़ रुपये टैक्स की चोरी पकड़ी है। सदस्यों को वहां पर लाल व काली मिर्च के अतिरिक्त बड़े पैमाने पर मसाला भी मिला है। सदस्यों ने फैक्ट्री को सीज करते हुए अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी है। एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-२ जीएस बोनाल के निर्देश पर मारी गयी छापेमारी में ज्वाइंट कमिश्रर वीके शुक्ला, डिप्टी कमिश्रर संजय मिश्रा, आनंद राय, असिस्टेंट कमिश्रर अरविंद पाठक आदि अधिकारी शामिल थे।
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इसलिए सेवई के नाम की काटी जाती थी बिल
मैक्रोनी व पास्ता पर 12 प्रतिशत टैक्स देना होता था लेकिन सेवई पर पांच प्रतिशत ही टैक्स लगता था इस तरह व्यापारी को सेवई का बिल काटने पर पांच प्रतिशत टैक्स की बचत हो जाती थी। संभावना जताया गया है कि लंबे समय से यह खेल चल रहा था इसलिए टैक्स की चोरी करोड़ों रुपये में पहुंच गयी थी। इस तरह का खेल अन्य व्यापारी भी कर रहे हैं जो अब वाणिज्यकर विभाग के रडार पर आ गये हैं।
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