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UP BOARD EXAM- फर्जी छात्र पकड़े गए तो प्रधानाचार्य होंगे दंडित
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UP BOARD EXAM- फर्जी छात्र पकड़े गए तो प्रधानाचार्य होंगे दंडित

डीआईओएस ने कहा प्रधानाचार्यों की है जिम्मेदारी। जिले में बहुतायत छात्र-छात्राओं के प्रवेश पत्र व उपस्थिति पंजिका पर नहीं है फोटो।
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वाराणसी

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Ajay Chaturvedi

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Updated: 5 Feb 2018, 5:39 PM IST

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा मंगलवार से शुरू हो रही हैं। इस बार परीक्षा में नकल माफिया के कॉकस को तोड़ने के लिए शासन और शिक्षा विभाग की ओर से पुख्ता इंतजाम करने का दावा किया जा रहा है। इसी के तहत ऑन लाइन परीक्षा फार्म भरवाए गए, परीक्षा केंद्रों का निर्धारण तक ऑन लाइन ही हुआ। बावजूद इसके जब छात्र-छात्राओं को प्रवेश पत्र मिला तो पता चला कि सैकड़ों परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र पर फोटो ही नहीं। इतना ही नहीं परीक्षा केंद्रों पर जो उपस्थिति पंजिका होती है उस पर भी फोटो नहीं है। ऐसे में जिला विद्यालय निरीक्षक ने व्यवस्था दी कि जिन छात्रों के प्रवेश पत्र पर फोटो नहीं है वहां के प्रधानाचार्य ही उन छात्र-छात्राओं के फोटो प्रमाणित करेंगे। ऐसे में यह आशंका जताई जाने लगी थी कि नकल माफिया इसका भरपूर फायदा उठा सकते हैं। बड़ी तादाद में फर्जी छात्रों के परीक्षा देने की आशंका भी जताई जा रही थी। लेकिन इस आशंका को निर्मूल साबित करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक ओपी राय ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया कि किसी भी हाल में एक भी फर्जी छात्र परीक्षा नहीं देने पाएगा। कहीं ऐसा प्रकरण सामने आया तो उसके लिए संबंधित प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे। कहा कि जब प्रवेश पत्र पर मैनुवली फोटो लगाई जाएगी और यह काम प्रधानाचार्य करेंगे तो उनकी जिम्मेदारी भी तय होगी। उन्हें किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी।

डीआईओएस ओपी राय

जिला विद्यालय निरीक्षक ने पत्रिका संग बातचीत में कहा कि बोर्ड के नियम के तहत ही यह जिम्मेदारी प्रधानाचार्यों को दी गई है कि जिनके प्रवेश पत्र पर छात्र-छात्रा की फोटो नहीं है उनकी फोटो वह प्रमाणित करें। साथ ही संबंधित परीक्षा केंद्र को भी वही प्रमाणित फोटो भेजेंगे ताकि किसी तरह की गड़बड़ी होने पाए। किसी दूसरे की जगह कोई दूसरा परीक्षा न देने पाए। उन्होंने कहा कि ऑन लाइन फार्म भरने की सूरत में ज्यादातर विद्यार्थी साइबर कैफे में जा कर फार्म भरते हैं ऐसे में इस तरह की गड़बड़ी की आशंका हमेशा बनी रहती है। वैसे भी ऑन लाइन व्यवस्था शुरू हुए ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। ऐसे में यह दिक्कत संभव है। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि किसी दूसरे की जगह कोई दूसरा परीक्षा दे पाएगा।

 

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बता दें कि शासन या यूपी बोर्ड नकल रोकने के चाहे जितने इंतजाम कर ले लेकिन नकल माफिया अपनी रणनीति में हर बार सफल हो जाते हैं। तमाम बंदिशों के बावजूद इस बार भी ऐसे परीक्षार्थियों की कमी नहीं होगी जिनके स्थान पर कोई दूसरा परीक्षा दे रहा होगा। असली और नकली परीक्षार्थी की पहचान करना कक्ष निरीक्षक के लिए आसान नहीं होगा। इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए ही बोर्ड और शासन दोनों ने यह तय किया था कि इस बार हर छात्र को प्रवेश पत्र के साथ आधार कार्ड भी ले जाना आनिवार्य होगा लेकिन नकल माफिया के दबाव के चलते शासन को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा। अब आलम यह है कि बोर्ड से जारी छात्रों के प्रवेश पत्र में अधिकांश पर संबंधित परीक्षार्थियों की फोटो ही नहीं है। यह मुद्दा गर्माने पर स्थानीय स्तर पर जिला विद्यालय नरीक्षक ओपी राय ने यह व्यवस्था दी है कि प्रधानाचार्य ऐसे छात्रों के प्रवेश पत्र पर संबंधित की फोटो लगा कर उसे प्रमाणित कर दें। जानकरों का कहना है कि यही तो खेल है नकल माफिया का।


जानकारों का कहना है कि नकल माफिया वर्षों से यही खेल करते आ रहे हैं। वो बाहर छात्रों का ठेके पर विभिन्न स्कूलों में दाखिला दिलाते हैं। ये छात्र साल भर स्कूल नहीं आते। माफिया ही इनके परीक्षा फार्म भरवाते हैं। पूरी परीक्षा अवधि तक इनके रहने-खाने का उम्दा इंतजाम होता है। छात्रों को बटोरने के चलते ही परीक्षा फार्म हो या पंजीकरण फार्म कभी भी नियत समय के भीतर जमा नहीं किए जाते। अंतिम तिथि क्या उसके बाद बोर्ड से दी गई नोटिसों कों भी ये नजरंदाज करते रहते हैं। फिर परीक्षा तिथि घोषित होने के बाद ये फार्म बोर्ड कार्यालय को भेजे जाते हैं। उसमें से ज्यादातर में फोटो ही नहीं होती है। सूत्र बताते हैं फोटो न लगाने के पीछे यह मकसद होता है कि अंतिम वक्त में जो भी छात्र आ जाएगा उसकी फोटो लगा कर उसे ही परीक्षार्थी घोषित कर दिया जाएगा। पहले जब सारा काम मैनुअली हुआ करता था तब यह काम कहीं ज्यादा आसान था। इसी गड़बड़ी को रोकने के लिए सब कुछ ऑानलाइन किया गया लेकिन उसके बाद भी ये अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे। इस बार भी बड़ी तादाद में ऐसे फर्जी छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की इजाजत मिल जाएगी। बतादें कि पिछले वर्ष ही वाराणसी, गाजीपुर, बलिया के विभिन्न केंद्रों पर दर्जन भर से ज्यादा फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए थे। वाराणसी में ही चार फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए थे। इतना ही नहीं नकल माफिया के सांठ-गांठ से जिले के एक केंद्र पर 19 उत्तर पुस्तिकाएं केंद्र के बाहर लिखते हुए पकड़ी गई थी। इस बार यह संख्या और बढ़े तो आश्चर्य नहीं होगा। हालांकि जिला विद्यालय निरीक्षक राय ने इन सभी आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि इस बार नकल माफिया की नहीं चलने वाली।