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सुबह होगी बैंक खुलेगा और तभी तो पैसा मिलेगा…इसी आस में बैंक के बाहर अन्नदाता काट रहे रात

पासबुक पर पत्थर रखकर..बैंक के बाहर ही जमीन पर किसान काट रहे रात..अपने हक के पैसे के लिए भी करना पड़ रहा लंबा इंतजार
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विदिशा

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Shailendra Sharma

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Updated: 27 May 2021, 3:29 PM IST

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विदिशा. एक तरफ जहां कोरोना का कहर है और लोगों को घरों से बाहर न निकलने की समझाइश दी जा रही है वहीं दूसरी ओर किसानों को अपने ही पैसे निकालने के लिए बैंक के बाहर रात में भी लाइन लगाकर इंतजार करना पड़ रहा है। दिल को झकझोर देने वाला ये मामला विदिशा जिले के शमशाबाद का है। जहां रातभर किसान इस आस के साथ बैंक के बाहर कतार में अपनी-अपनी पास बुक पर पत्थर रख सुबह होने का इंतजार करते हैं कि सुबह होगी और बैंक खुलेगा तो उनका नंबर लग जाएगा जिससे वो अपना पैसा निकाल सकेंगे।

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आस में गुजर रही अन्नदाता की रात
बैंक के बाहर रात में कतार लगाकर सुबह होने का इंतजार कर रहे किसानों ने बताया कि किसान योजना और समर्थन मूल्य पर बेचे गए गेहूं का पैसा बैंक खातों में आ गया है और उसी को निकालने के लिए उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह बैंक में नंबर लग जाए इसी आस के साथ वो रातभर बैंक के बाहर ही खड़े रहते हैं ताकि सुबह होते ही नंबर लगा सकें और उन्हें टोकन मिल जाए जिससे कि वो अपना पैसा बैंक से निकाल सकें। कुछ किसानों ने बताया कि उन्हें कई लोगों का उधार चुकाना है और अगर वक्त पर साहूकारों का उधार नहीं चुकाया तो दिक्कत होगी। तो वहीं कुछ किसानों के घरों में शादी है जिन्हें शादी के लिए पैसों की जरुरत है। किसी को खेती-बाड़ी के लिए पैसों की जरुरत है। इसलिए वो दिन रात बैंक के बाहर ही गुजार रहे हैं। रात के वक्त किसान अपनी अपनी पास बुक को लाइन में रखकर उनपर पत्थर रख देते हैं और दूर सोशल डिस्टेसिंग के साथ जमीन पर ही सो जाते हैं।

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एक दिन में 150 लोगों को ही किया जा रहा भुगतान
आखिरकार ऐसी कौन सी वजह है कि किसानों को अपने ही पैसों के लिए रातभर बैंक के बाहर इंतजार करना पड़ रहा है तो इसका जवाब कुछ ऐसा है। दरअसल शमशाबाद जिला सहकारी बैंक से मिली जानकारी के अनुसार पिछले 14 दिनों से बैंक बंद थी। बैंक के कुछ कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो गए थे जिसके कारण बैंक को सील कर दिया गया था और 14 दिनों तक बैंक बंद रही। अब जब 14 दिन बाद बैंक खुली है तो कम स्टाफ के साथ ही बैंक के कर्मचारी काम कर रहे हैं। बैंक से पैसे निकालने के लिए बड़ी संख्या में किसान रोजाना आस लिए बैंक पहुंचते हैं लेकिन एक दिन में 150 लोगों को ही बैंक से भुगतान किया जा रहा है जिसके कारण कई लोगों को खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है और वापस लौटने से अच्छा किसान रात में लाइन लगाकर सुबह अपना नंबर आने का इंतजार करने लगते हैं जिससे कि अगली सुबह उनका नंबर लग जाए।

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