
सोमालिया को क्यों कहा जाता है समुद्री लुटेरों का देश, PC-IANS
अफ्रीकी देश सोमालिया का नाम आते ही समुद्री लुटेरों और जहाजों के अपहरण की घटनाएं चर्चा में आ जाती हैं। हिंद महासागर और अदन की खाड़ी में वर्षों से सक्रिय समुद्री लुटेरों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए गंभीर चुनौती पैदा की है। हालांकि, सोमालिया को 'समुद्री लुटेरों का देश' कहना पूरे देश की पहचान नहीं, बल्कि उसके तटीय इलाकों में समुद्री डकैती के लंबे इतिहास से जुड़ी धारणा है। इसी समुद्री खतरे के बीच भारतीय नौसेना ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई है। नौसेना ने सोमालिया के तट के पास समुद्री लुटेरों के कब्जे से मछली पकड़ने वाले ईरानी जहाज 'अजिनी' (Azini) को मुक्त कराकर चालक दल के सभी 20 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया।
यह अभियान 2 नवंबर को अरब सागर में मुंबई से 3,000 किलोमीटर से अधिक दूर पूरा किया गया। भारतीय नौसेना और वायुसेना के संयुक्त प्रयास से 48 घंटे से अधिक समय तक चले ऑपरेशन में किसी के घायल होने या जान गंवाने की सूचना नहीं है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अभियान की सफलता पर नौसेना की सराहना की है।
सोमालिया में समुद्री डकैती की समस्या की जड़ें उसके राजनीतिक और आर्थिक इतिहास में छिपी हैं। वर्ष 1991 में राष्ट्रपति सियाद बर्रे की सरकार गिरने के बाद देश लंबे गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता की चपेट में आ गया। प्रभावी केंद्रीय शासन और समुद्री सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने से तटीय इलाकों में अपराधी समूहों की गतिविधियां बढ़ने लगीं।
सोमालिया के समुद्री क्षेत्र में विदेशी जहाजों द्वारा अवैध मछली पकड़ने की घटनाओं ने भी स्थानीय मछुआरों की आजीविका प्रभावित की। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती दौर में कुछ समूहों ने समुद्री संसाधनों की रक्षा के नाम पर विदेशी जहाजों को रोकना शुरू किया। समय के साथ यह गतिविधि संगठित अपराध में बदल गई और फिरौती के लिए जहाजों का अपहरण होने लगा।
गरीबी, बेरोजगारी और कमजोर कानून-व्यवस्था ने समुद्री डकैती को बढ़ावा दिया। विशेष रूप से 2008 से 2012 के आसपास सोमालिया के समुद्री लुटेरे अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए बड़ी चुनौती बन गए थे। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभियानों के बाद ऐसी घटनाओं में काफी कमी आई।
जानकारी के अनुसार, 29 अक्टूबर को सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट पर बंदर बैला और हाफुन के बीच हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाज 'अजिनी' को अगवा कर लिया था। आशंका थी कि लुटेरे इस जहाज का इस्तेमाल दूसरे व्यावसायिक जहाजों पर हमले करने के लिए कर सकते हैं। समुद्री सुरक्षा की भाषा में ऐसे जहाज को 'मदर शिप' कहा जाता है, जिससे लुटेरे समुद्र में दूर तक जाकर हमले कर सकते हैं।
खतरे की जानकारी मिलते ही भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में तैनात अपने युद्धपोत को अभियान में लगाया। साथ ही समुद्री निगरानी विमान की मदद से अगवा जहाज की तलाश शुरू हुई। लगातार निगरानी के बाद जहाज का पता लगाया गया और उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई।
नौसेना ने लुटेरों को भागने से रोकने के लिए नियंत्रित गैर-घातक उपाय अपनाए। इसके बाद भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान की सहायता से मरीन कमांडो को अभियान क्षेत्र तक पहुंचाया गया। कमांडो ने सुनियोजित कार्रवाई करते हुए हथियारबंद लुटेरों के खतरे को निष्क्रिय किया और जहाज को सुरक्षित नियंत्रण में ले लिया।
इस अभियान में चालक दल के सभी 20 सदस्यों को सुरक्षित छुड़ाया गया। नौसेना के अनुसार, पूरी कार्रवाई में किसी के घायल होने या जान गंवाने की सूचना नहीं है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना को बधाई देते हुए कहा कि यह अभियान उसकी उच्च परिचालन क्षमता और समुद्री खतरों से निपटने की तत्परता को दर्शाता है। उन्होंने भारतीय वायुसेना के समय पर मिले सहयोग की भी सराहना की। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय जवानों ने एक बार फिर समुद्र में लोगों की जान बचाने और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा एवं स्थिरता बनाए रखने की भारत की प्रतिबद्धता साबित की है।
भारतीय नौसेना वर्ष 2008 से अदन की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में समुद्री डकैती रोकने के लिए अभियान चलाती रही है। मार्च 2024 में भी नौसेना ने मालवाहक जहाज एमवी रुएन को समुद्री लुटेरों से मुक्त कराकर 17 लोगों को बचाया था। उस अभियान में 35 समुद्री लुटेरों ने आत्मसमर्पण किया था। ताजा अभियान ने एक बार फिर दिखाया है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों, नाविकों और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए सक्रिय है।
Updated on:
3 Nov 2026, 10:16 AM IST
Published on:
3 Nov 2026, 10:06 AM IST
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