
US Midterm Elections: (AI Photo)
US Midterm Elections: अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिडटर्म चुनाव होने जा रहे हैं। इनका असर भारत पर भी पड़ सकता है, खासकर H1B वीजा, ग्रीन कार्ड, टैरिफ यानी आयात शुल्क, भारतीय पेशेवरों और दोनों देशों के रिश्तों पर। चुनाव के नतीजे नीतियों की दिशा तय करेंगे, लेकिन असली बदलाव अदालतों, सरकारी एजेंसियों और कंपनियों के फैसलों से धीरे धीरे नजर आएगा।
इस बार अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों और ऊपरी सदन सीनेट की 35 सीटों पर वोट पड़ेंगे। अभी दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है। हाउस में बहुमत के लिए डेमोक्रेट्स को कुल तीन सीटों का फायदा चाहिए, जबकि सीनेट में चार सीटों का। अगर डेमोक्रेट्स किसी एक सदन में भी बढ़त बना लेते हैं, तो ट्रम्प प्रशासन की H1B और व्यापार से जुड़ी नीतियों पर संसद में सवाल और जांच बढ़ सकती है।
सितंबर 2025 में ट्रम्प प्रशासन ने विदेश से आने वाले नए H1B आवेदनों पर एक लाख डॉलर की एकमुश्त फीस लगा दी थी। जून 2026 में अमेरिका की एक संघीय अदालत ने इसे गैरकानूनी बताते हुए रद्द कर दिया और जुलाई में अपील अदालत ने इसे फिर से लागू करने से मना कर दिया। लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। सरकार की अपील जारी है और सितंबर में राष्ट्रपति ने इस फीस का आदेश सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया है।
बता दें कि ग्रीन कार्ड की राह भी मुश्किल हुई है। 8 अक्टूबर को अमेरिकी श्रम विभाग ने माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, इंफोसिस, TCS, विप्रो, HCL, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी को PERM प्रक्रिया से रोक दिया।
PERM ज्यादातर नौकरी आधारित ग्रीन कार्ड का पहला कदम होता है, यानी इन कंपनियों के जरिए नई फाइलें और अटकी हुई फाइलें अभी आगे नहीं बढ़ेंगी। राहत की बात यह है कि इन कंपनियों में काम कर रहे लोगों का H1B स्टेटस इससे नहीं बदला है। डेमोक्रेट्स के हाथ में सदन आने पर ये फैसले संसद की सुनवाई और बजट के रास्ते चुनौती झेल सकते हैं, लेकिन तुरंत असर की उम्मीद कम है।
2025 में अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत जवाबी टैरिफ लगाया था। रूस से तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत और जोड़ दिया गया, जिससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।
फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति आपातकालीन कानून IEEPA के तहत इस तरह के टैरिफ नहीं लगा सकते और ये टैरिफ रद्द हो गए। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने दुनिया भर के आयात पर 10 प्रतिशत का अस्थायी शुल्क लगाया। वह 24 जुलाई को खत्म हो गया और अब उसकी जगह सेक्शन 301 के तहत 10 प्रतिशत का शुल्क लागू है।
भारत और अमेरिका के बीच फरवरी में व्यापार समझौते का ढांचा घोषित हुआ था, लेकिन अक्टूबर तक कोई समझौता साइन नहीं हुआ है। हाउस पर डेमोक्रेट्स का कब्जा हुआ तो वे टैरिफ नीति पर सुनवाई कर सकते हैं। लेकिन तुरंत बदलाव मुश्किल है, क्योंकि कई फैसले कार्यकारी आदेशों से लिए गए हैं।
2024 में H1B वीजा की मंजूरियों में भारतीयों का हिस्सा करीब 71 प्रतिशत था। इसलिए वीजा और ग्रीन कार्ड के हर बदलाव का सबसे बड़ा असर भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर पड़ता है। संसद में इस वक्त कई प्रस्ताव हैं। इनमें से एक SMARTER Act है, जिसे रिपब्लिकन सांसद डेविड श्वाइकर्ट ने पेश किया है।
यह H1B लॉटरी की जगह पॉइंट आधारित व्यवस्था लाने और ग्रीन कार्ड में देशवार सीमा हटाने की बात करता है। देशवार सीमा हटने से भारतीयों को फायदा हो सकता है, पर पुराने आवेदकों का क्या होगा, यह साफ नहीं है। यह बिल अभी कानून नहीं बना है और इसके जल्द पास होने के आसार कम बताए जा रहे हैं।
कार्नेगी संस्था के अनुमान के मुताबिक अमेरिका में करीब 26 लाख भारतीय अमेरिकी वोट डालने के योग्य हैं। वे पेंसिल्वेनिया, मिशिगन, जॉर्जिया, टेक्सास और न्यू जर्सी जैसे राज्यों में फैले हैं। 2026 के एक सर्वे में 66 प्रतिशत भारतीय अमेरिकी मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में रुझान जताया।
हालांकि यह सर्वे छोटे सैंपल पर आधारित है। कार्नेगी के सर्वे में खुद को डेमोक्रेट बताने वाले भारतीय अमेरिकियों का हिस्सा 2020 के 52 प्रतिशत से घटकर 2026 में 46 प्रतिशत रह गया है। यानी समुदाय का झुकाव डेमोक्रेट्स की तरफ है, पर पार्टी से जुड़ाव कमजोर हुआ है। महंगाई, इमिग्रेशन नीति और H1B जैसे मुद्दे उनके फैसले पर असर डाल सकते हैं।
टैरिफ, वीजा और व्यापार की नीतियां दोनों देशों के रिश्तों पर असर डालती हैं। डेमोक्रेट्स को संसद में ताकत मिली तो इन नीतियों पर ज्यादा पारदर्शिता और जांच संभव है, लेकिन तुरंत बड़े बदलाव की गुंजाइश कम है।
भारत के लिए बेहतर यही होगा कि वह देश में उत्पादन बढ़ाए, निर्यात के लिए नए बाजार खोजे और विदेशी निवेश को खींचे, ताकि किसी एक देश की नीति के झटके से बचा जा सके।
हाउस की 435 सीटें, बहुमत के लिए 218 चाहिए। अभी रिपब्लिकन 218 और डेमोक्रेट्स 214 पर हैं, दो सीटें खाली हैं। डेमोक्रेट्स को करीब तीन सीटों का शुद्ध फायदा चाहिए।
सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव, बहुमत के लिए 51 चाहिए। अभी रिपब्लिकन 53 और डेमोक्रेट्स 47 पर हैं, जिनमें दो निर्दलीय शामिल हैं। डेमोक्रेट्स को चार सीटों का शुद्ध फायदा चाहिए। बराबरी होने पर उपराष्ट्रपति जे डी वेंस का वोट रिपब्लिकन के पक्ष में जाता है, इसलिए उन्हें सिर्फ 50 सीटें चाहिए।
21 सितंबर 2025 को फीस लागू हुई। दिसंबर 2025 में वॉशिंगटन की अदालत ने फीस को सही ठहराया। 8 जून 2026 को मैसाचुसेट्स की संघीय अदालत ने इसे रद्द किया। 24 जुलाई को अपील अदालत ने सरकार की रोक की मांग ठुकरा दी। 18 सितंबर को राष्ट्रपति ने फीस 21 सितंबर 2027 तक बढ़ाई। सरकार की अपील अब भी चल रही है।
अगस्त 2025 में 25 प्रतिशत जवाबी टैरिफ और रूस के तेल पर 25 प्रतिशत और, कुल 50 प्रतिशत। फरवरी 2026 में व्यापार समझौते का ढांचा घोषित हुआ, रूस वाला अतिरिक्त 25 प्रतिशत हटा। 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA वाले टैरिफ को अवैध बताया। 24 फरवरी से 24 जुलाई तक 10 प्रतिशत का अस्थायी शुल्क रहा। 24 जुलाई से सेक्शन 301 के तहत 10 प्रतिशत का शुल्क लागू है।
कहना होगा कि मिडटर्म चुनाव का भारत पर असर बड़ा भी है और उलझा हुआ भी। H1B, ग्रीन कार्ड, टैरिफ और रिश्तों की दिशा काफी हद तक इस पर टिकी है कि संसद पर किसका कब्जा होता है।
लेकिन असली तस्वीर अदालतों, एजेंसियों और कंपनियों के फैसलों से धीरे धीरे साफ होगी। इसलिए भारतीय पेशेवरों, छात्रों और नीति बनाने वालों को हर कदम पर नजर रखनी होगी।
Published on:
30 Oct 2026, 4:00 PM IST
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