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मक्का में ड्रोन अलर्ट से फिर याद आया 1979 का वह खौफनाक दिन, जब ग्रैंड मस्जिद पर हुआ था कब्जा

Saudi Yemen Coalition Houthi Drone: सऊदी अरब ने मक्का की ओर बढ़ रहे हूती ड्रोन को मार गिराया, जिसके बाद 1979 में ग्रैंड मस्जिद पर हुए ऐतिहासिक कब्जे की यादें ताजा हो गईं। हालांकि इस बार घटना का स्वरूप अलग है—तब सशस्त्र विद्रोहियों ने मस्जिद पर कब्जा किया था, जबकि मौजूदा मामला क्षेत्रीय संघर्ष से जुड़े ड्रोन खतरे का है।
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भारत

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Ashib Khan

Sep 16, 2026

Mecca security alert Houthi

सऊदी अरब ने हूती ड्रोन को मार गिराया (Photo-X @VictorKvert2008)

Saudi Arabia Houthi Drone Mecca: सऊदी अरब ने मक्का की ओर बढ़ रहे एक हूती ड्रोन को मार गिराया। बुधवार को इसकी पुष्टि सऊदी नेतृत्व वाले यमन सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने की है। वहीं हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है। मंगलवार को मक्का में अधिकारियों ने अलर्ट जारी किया था। इस घटना ने करीब 47 साल पुरानी एक घटना की याद को ताजा कर दिया है। जब मक्का में स्थित अल-हरम मस्जिद को हथियारबंद विद्रोहियों ने अपने कब्जे में ले लिया था।

1979 में ग्रैंड मस्जिद पर कब्जा

घटना 20 नवंबर 1979 को हुई थी। जब फजर की नमाज के बाद हजारों नमाजी मस्जिद में मौजूद थे। तभी पूर्व सऊदी नेशनल गार्ड सदस्य और धार्मिक उपदेशक जुहैमैन अल-उतैबी के नेतृत्व में सैकड़ों हथियारबंद लोगों ने मस्जिद पर कब्जा कर लिया और हंगामा मच गया। फिर गोलियां चली। 

धार्मिक उपदेशक जुहैमान अल-उतैबी ने मस्जिद के इमाम को एक तरफ धकेल दिया और उनसे माइक ले लिया। मस्जिद में मौजूद लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। 

ताबूतों में छिपाकर मस्जिद के अंदर पहुंचाएं हथियार

बताया जाता है कि विद्रोहियों ने मस्जिद के अंदर ताबूतों में छिपाकर हथियार पहुंचाएं थे। विद्रोहियों ने मस्जिद की मीनारों, कमरों और भूमिगत हिस्सों में मोर्चे बना लिए। सऊदी सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मक्का के पवित्र क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बेहद संवेदनशील थी। वरिष्ठ धार्मिक विद्वानों से अनुमति मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने अभियान तेज किया।

दो सप्ताह तक चली लड़ाई

सुरक्षाबलों और विद्रोहियों के बीच यह लड़ाई करीब दो सप्ताह तक चली। 4 दिसंबर 1979 को मस्जिद पर दोबारा सुरक्षाबलों ने अपना कब्जा कर लिया। विद्रोहियों से भूमिगत हिस्सों को खाली कराने के लिए विशेष गैस का इस्तेमाल किया गया और फ्रांसीसी विशेषज्ञों ने अभियान की योजना में तकनीकी सहायता दी।

जुहैमैन को जिंदा गिरफ्तार किया गया। 9 जनवरी 1980 को उसके साथ कुल 63 विद्रोहियों को सऊदी अरब के अलग-अलग शहरों में सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई।

हमले के बाद बदला सऊदी समाज

1979 की घटना ने सऊदी शासन की धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया। इसके बाद देश में धार्मिक रूढ़िवाद और सामाजिक नियंत्रण और मजबूत हुआ। दशकों बाद क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में सऊदी अरब ने सामाजिक और आर्थिक सुधारों की दिशा में बदलाव शुरू किया।

आज की स्थिति 1979 से बिल्कुल अलग है। उस समय मक्का के भीतर सशस्त्र विद्रोहियों ने ग्रैंड मस्जिद पर कब्जा किया था, जबकि इस बार खतरा एक क्षेत्रीय संघर्ष से जुड़े ड्रोन हमले का था।