
अब्बास अराघची (Photo - ANI)
ईरान (Iran) के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने रूस (Russia) की राजधानी मॉस्को (Moscow) में आयोजित गैस एक्सपोर्टिंग कंट्रीज़ फोरम शिखर सम्मेलन (Gas Exporting Countries Forum / GECF Summit) में हिस्सा लिया। इस शिखर सम्मेलन में उन्होंने ईरान का कूटनीतिक पक्ष रखा।
अराघची ने गल्फ में इज़रायल (Israel) की गलत हरकत को लेकर चेतावनी दी है। सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने लिखा, "जीईसीएफ शिखर सम्मेलन में ईरान की ऊर्जा कूटनीति आगे बढ़ी। इस दौरान हुई चर्चा मुख्य रूप से वैश्विक गैस बाजारों और ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित रही। पर्शियन गल्फ क्षेत्र में इज़रायल ने अगर कोई भी गलत हरकत या सैन्य दुस्साहसिक कार्रवाई की, तो इसका वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है और ये तबाही की ओर जा सकते सकते हैं। यह गैस आपूर्तिकर्ताओं और उपभोक्ताओं दोनों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।"
गैस एक्सपोर्टिंग कंट्रीज़ फोरम यानी जीईसीएफ प्राकृतिक गैस का उत्पादन करने वाले प्रमुख देशों का एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसकी स्थापना 2001 में हुई थी और इसका मुख्यालय कतर के दोहा में है। जीईसीएफ गैस के उत्पादक और उपभोक्ता देशों के लिए एक मंच के रूप में काम करता है, जहाँ वैश्विक गैस बाजार में स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और मांग-आपूर्ति के संतुलन पर चर्चा होती है। इसमें गैस इंडस्ट्री से संबंधित डेटा एकत्र भी किया जाता है और प्रकाशित भी किया जाता है। जीईसीएफ में सदस्य देशों के बीच तकनीकी आदान-प्रदान, अच्छी कार्यप्रणालियों और प्राकृतिक गैस के बुनियादी ढांचे में संयुक्त निवेश को प्रोत्साहित करने का काम भी किया जाता है। यह फोरम सदस्य देशों के अपने प्राकृतिक गैस संसाधनों पर संप्रभु अधिकारों का भी समर्थन करता है और प्राकृतिक गैस को एक स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा स्रोत के रूप में बढ़ावा देता है।
अराघची ने कुछ दिन पहले अमेरिका (United States of America) और इज़रायल के सैन्य संबंध पर निशाना साधा। अराघची ने सोशल मीडिया पर आंकड़ों का पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "पिछले तीन वर्षों में अमेरिका ने इज़रायल की मिसाइल सुरक्षा पर टैक्सपेयर्स के 11 बिलियन डॉलर खर्च किए हैं। इज़रायल की रक्षा के लिए अमेरिका ने खुद इज़रायल से भी ज़्यादा इंटरसेप्टर दागे हैं। अमेरिका और इज़रायल सैन्य संबंध आपसी फायदे वाला सहजीवी संबंध नहीं है, बल्कि परजीवी संबंध है।" आपकी जानकारी के लिए बता दें कि परजीवी संबंध की स्थिति में परजीवी को ही पूरा फायदा होता है। वहीँ मेजबान/परपोषी वो होता है जो परजीवी को फायदा पहुंचता है, लेकिन इस संबंध में उसे कोई फायदा नहीं होता, बल्कि सिर्फ नुकसान ही झेलना पड़ता है। अराघची के अनुसार इज़रायल इस सैन्य संबंध में अमेरिका से पूरी तरह से फायदा ले रहा है, जबकि अमेरिका नुकसान झेलते हुए सिर्फ इज़रायल की मदद कर रहा है।
Updated on:
28 Oct 2026, 3:02 PM IST
Published on:
28 Oct 2026, 2:44 PM IST
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