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वापस लौटेगा हिंदुस्तान का ‘ब्रेन-ड्रेन’! अमरीका में पेश हुआ H1B विधेयक, जानें कैसा होगा ‘खतरा’

H1B विधेयक पारित होता है तो अमेरिका में कंपनियां एच-1बी वीजा देकर विदेशी पेशेवरों को आसानी से नौकरी नहीं दे पाएंगी। इसका सबसे बड़ा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ेगा।
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कोरबा

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Nakul Devarshi

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Updated: 2 Feb 2017, 12:52 PM IST


अमेरिका ने भारतीय पेशेवरों को बड़ा झटका दे दिया है। अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा में सोमवार को एच-1बी वीजा में सुधार को लेकर नया विधेयक पेश किया गया। यह विधेयक पारित होता है तो अमेरिका में कंपनियां एच-1बी वीजा देकर विदेशी पेशेवरों को आसानी से नौकरी नहीं दे पाएंगी। इसका सबसे बड़ा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ेगा।



कैलिफोर्निया के सांसद जोए लोफग्रेन ने 'हाई स्किल्ड इंटिग्रिटी एंड फेयरनेस एक्ट 2017' (उच्च कुशल निष्ठा एवं निष्पक्षता अधिनियम 2017) विधेयक पेश किया।

इसके मुताबिक एच-1बी वीजा पर बुलाए जाने वाले पेशेवर को 1.30 लाख डॉलर से अधिक के वेतन पर ही नियुक्त किया जाएगा। वर्तमान में ऐसे वीजाधारक के न्यूनतम वेतन की सीमा 60 हजार डॉलर है।


संभावना है कि ट्रंप एच-1बी वीजा पर कार्यकारी आदेश भी ला सकते हैं। इसका मसौदा तैयार है। एच-1बी वीजा अर्हता प्राप्त पेशेवर को दिया जाता है। इसी के आधार पर अमेरिका में कंपनियां हर साल हजारों विदेशी पेशेवरों को अपने यहां नौकरी पर रखती हैं।

भारत पर असर
एक लाख से ज्यादा एच-1बी वीजा धारक भारतीय अमेरिका में काम करते हैं। विधेयक पास होने पर इन्हें वापस लौटने को मजबूर होना पड़ सकता है। साथ ही नए पेशेवरों के लिए मौके कम होने की संभावना।

हमारी मुश्किलें
- 86 फीसदी हिस्सेदारी भारतीय आईटी कंपनियों की एच-1बी वीजा में।
- 65 हजार लोगों को ए-1बी वीजा हर साल देता है अमेरिका।
- 65 प्रतिशत तक यह वीजा भारतीयों को मिलते है।
- 80 हजार डॉलर तक सालाना वेतन एच-1बी वीजाधारक नए पेशेवर का।


ट्रंप क्या चाहते हैं
राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि उनके देश में कंपनियां ज्यादा से ज्यादा अमेरिकियों को नौकरी पर रखें।

नए बिल का प्रभाव
बिल पास होने पर एच-1बी वीजा वालों को ज्यादा वेतन देना होगा। भारतीय वहां अमेरिकियों के मुकाबले कम वेतन में काम करते हैं। ऐसे में अमेरिकी पेशेवर पिछड़ जाते हैं।