
चीन के वैज्ञानिक। (फाइल फोटो- द वाशिंगटन पोस्ट)
China News In Hindi: चीन ने एक और कमाल कर दिखाया है। उसने दुनिया का सबसे छोटा सीटी स्कैनर बना दिया है। जिसका वजन सिर्फ 6 किलोग्राम है। इसे 'हथेली वाला सीटी स्कैनर' कहा जा रहा है।
शांडोंग प्रांत की कंपनी रेयिम ने यह एक्सटॉमो-क्यूब नाम का पोर्टेबल स्कैनर तैयार किया है। चीनी अकादमी ऑफ साइंसेज के वरिष्ठ इंजीनियर और रेयिम के जनरल मैनेजर लियू बाओडोंग ने बताया कि इसे एक हाथ में पकड़कर कहीं भी ले जाया जा सकता है।
यह दुनिया का सबसे छोटा और हल्का सीटी सिस्टम है। इस मशीन की खास बात इसकी रिजॉल्यूशन है। यह 80 माइक्रोमीटर तक की डिटेल दिखा सकती है, जो लगभग एक बाल जितनी पतली होती है।
इससे घोंघे के खोल से लेकर दवा की कैप्सूल तक की अंदरूनी तस्वीरें साफ निकाली जा सकती हैं। बिजली की खपत भी सिर्फ 200 वॉट है, यानी यह आम पोर्टेबल पावर बैंक से भी चल सकती है। फील्डवर्क के दौरान यह बहुत काम आएगी।
पहले सबसे छोटे सीटी स्कैनर का रिकॉर्ड जर्मनी के पास था, जिसका वजन 19 किलो था। अब चीन ने इसे बहुत पीछे छोड़ दिया है। मशीन के सभी मुख्य पार्ट्स जैसे एक्स-रे सोर्स, घूमने वाला प्लेटफॉर्म और डिटेक्टर चीन में ही बने हैं।
आम तौर पर अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले सीटी स्कैनर दो मीटर ऊंचे और चौड़े होते हैं और वजन दो टन तक पहुंच जाता है। औद्योगिक इस्तेमाल वाले तो और भी भारी होते हैं। लेकिन यह नया स्कैनर सिर्फ छोटे चीजों के लिए बनाया गया है।
इसमें जीवाश्म, पुरातात्विक अवशेष या छोटी औद्योगिक चीजें बिना नुकसान पहुंचाए अंदर से देखी जा सकती हैं। लियू बाओडोंग ने कहा- सीटी स्कैनर कई तरह के होते हैं, जैसे कारों के मॉडल। यह कॉम्पैक्ट कार की तरह है। इसे हर चीज स्कैन करने के लिए नहीं, बल्कि छोटी चीजों के अंदर झांकने के लिए बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि चार लीटर के पैकेज में एक्स-रे सोर्स, डिटेक्टर और रोटेटिंग प्लेटफॉर्म फिट करना चुनौती भरा था, फिर भी इमेजिंग क्वालिटी अच्छी रखी गई है।
कम ऊर्जा वाले एक्स-रे और छोटे आकार की वजह से यह यूनिवर्सिटी क्लासरूम और रिसर्च लैब में आसानी से इस्तेमाल हो सकता है। कई कमर्शियल सिस्टम के उलट इसमें सेटिंग्स और रॉ डेटा यूजर्स के लिए खुले हैं।
छात्र और रिसर्चर खुद प्रयोग कर सकते हैं कि इमेज कैसे बनती है, कैसे बेहतर बनाई जाती है। सीटी यानी कंप्यूटेड टोमोग्राफी में अलग-अलग एंगल से एक्स-रे लेकर अंदरूनी संरचना की 3डी तस्वीर बनाई जाती है।
1971 में लंदन में पहली बार मरीज पर इसका इस्तेमाल हुआ था। तब मशीन तीन मीटर लंबी थी और सिर्फ सिर स्कैन कर सकती थी। आज अस्पतालों में ट्यूमर, खून बहना जैसी समस्याएं पकड़ने में यह आम है। अब छोटी चीजों के लिए भी यह तकनीक आसान हो गई है।
Updated on:
16 Sept 2026 12:48 pm
Published on:
16 Sept 2026 12:48 pm
