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मिस्र में मीडिया पर फिर संकट, 6 और पत्रकारों को पुलिस ने किया गिरफ्तार, गलत सूचना फैलाने का आरोप

Egyptian journalists detention: मिस्र में फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट मत्सद्दाश के 6 पत्रकारों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उन पर गलत सूचना फैलाने और मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े होने का आरोप है।
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भारत

•

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Mukul Kumar

•

Oct 01, 2026

Arrest News

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स-IANS)

Matsadash newsroom raid: मिस्र में एक बार फिर मीडिया पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। फैक्ट चेकिंग और जांच पड़ताल करने वाली डिजिटल वेबसाइट 'मत्सद्दाश' के पूरे न्यूजरूम को खाली कर दिया गया। पुलिस ने सभी छह पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया है।

सोमवार शाम को सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मी पत्रकारों के घरों पर पहुंचे। उन्होंने घरों की तलाशी ली और लैपटॉप, मोबाइल फोन समेत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर लिए।

क्या है पत्रकारों पर आरोप?

मिस्र पर्सनल राइट्स इनिशिएटिव (EIPR) ने इस बारे में जानकारी दी है। यही संगठन इन पत्रकारों को कानूनी मदद भी दे रहा है। गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर आरोप लगाया कि यह वेबसाइट विदेश से चलायी जा रही थी।

मंत्रालय के अनुसार, यह मुस्लिम ब्रदरहुड के मीडिया नेटवर्क का हिस्सा थी और देश के अंदर ब्रदरहुड के लोग भी इसमें मदद कर रहे थे। मुस्लिम ब्रदरहुड को मिस्र में 2013 से आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। उसी साल सेना ने चुने हुए राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को हटा दिया था, जो ब्रदरहुड से जुड़े थे।

2018 से काम कर रहा है मत्सद्दाश

हालांकि, मत्सद्दाश ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। वेबसाइट ने अपने बयान में कहा कि वह ब्रदरहुड से जुड़ी नहीं है। बल्कि उसने कई बार ब्रदरहुड से जुड़े मीडिया आउटलेट्स की गलत खबरों को सही किया है। मत्सद्दाश 2018 से काम कर रहा है।

यह मुख्य रूप से फैक्ट चेक और जांच रिपोर्ट प्रकाशित करता है। मिस्र में स्वतंत्र मीडिया के लिए हालात लंबे समय से कठिन रहे हैं। गलत खबर या अफवाह फैलाने के आरोप में कई पत्रकार और कार्यकर्ता गिरफ्तार होते रहे हैं।

19 पत्रकार पहले से जेल में बंद

कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स के आंकड़ों के मुताबिक, अभी मिस्र में 19 पत्रकार पहले से जेल में बंद हैं। विदेशी मीडिया से संपर्क रखने वाली संस्था 'राज्य सूचना सेवा' ने फिलहाल इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की।

यह घटना मिस्र में प्रेस की आजादी को लेकर फिर से सवाल खड़े कर रही है। पत्रकारों का कहना है कि ऐसे आरोपों के चलते स्वतंत्र रिपोर्टिंग करना मुश्किल हो जाता है।