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Iran Ceasefire Proposal: ट्रंप ने ठुकराया ईरान का सीजफायर ऑफर, पे़जेश्कियन बोले- आखिरी सांस तक लड़ेंगे!

Trump rejects Iran proposal: सात दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति ने ठुकराया तो तेहरान से आया संदेश और सख्त हो गया। होर्मुज से लेकर परमाणु वार्ता तक, अब अगला कदम दोनों देशों के फैसलों पर टिका है।
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भारत

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Manoj Vashisth

•

Sep 27, 2026

Iran ceasefire proposal

Iran ceasefire proposal : ट्रंप के सीजफायर ठुकराते ही पे़जेश्कियन ने दिया बड़ा बयान (Photo - Video Screenshot from @clashreport)

Trump Iran ceasefire: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां युद्ध रोकने की कूटनीतिक कोशिश और सैन्य दबाव आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और बातचीत आगे बढ़ाने के लिए सात दिन का रोडमैप रखा था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद राष्ट्रपति मसूद पे़जेश्कियन ने घरेलू समर्थन के बीच संकेत दिया कि अमेरिकी और इजरायली दबाव के बावजूद ईरान अपनी स्थिति से पीछे नहीं हटेगा।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां युद्ध रोकने की कूटनीतिक कोशिश और सैन्य दबाव आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। तेहरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और बातचीत आगे बढ़ाने के लिए सात दिन का रोडमैप रखा था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद राष्ट्रपति मसूद पे़जेश्कियन ने घरेलू समर्थन के बीच संकेत दिया कि अमेरिकी और इजरायली दबाव के बावजूद ईरान अपनी स्थिति से पीछे नहीं हटेगा।

Iran Ceasefire Proposal: क्या है पूरा मामला?

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पे़जेश्कियन ने कहा है कि उनका देश अमेरिका और इजरायल के दबाव के सामने पीछे नहीं हटेगा। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा लेकर तेहरान लौटने के बाद एयरपोर्ट पर समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने ईरान की दृढ़ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की सेवा करती रहेगी और देश अपने रुख पर कायम रहेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब युद्ध समाप्त करने की कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, पे़जेश्कियन ने कहा कि ईरान “आखिरी सांस तक” डटा रहेगा।

Iran Ceasefire Proposal: अमेरिका ने प्रस्ताव क्यों ठुकराया?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र में बताया था कि तेहरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका को सात दिन का एक रोडमैप भेजा है। प्रस्ताव के तहत परिस्थितियां अनुकूल होने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल करने और इसके बाद परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू करने की बात कही गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी में ढील, तेल बिक्री से जुड़े प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय युद्धविराम जैसी शर्तें भी रखी थीं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 26 सितंबर को पत्रकारों से बातचीत में इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। अल जज़ीरा ने ट्रंप के हवाले से बताया कि उन्होंने ईरानी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

होर्मुज क्यों बना सबसे अहम मुद्दा?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ने वाला यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। यहां लंबे समय तक व्यवधान का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहता, बल्कि तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन और एशियाई ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।

ईरान ने पहले संकेत दिया था कि अमेरिकी सैन्य दबाव और ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी में राहत मिलने की स्थिति में वह एक सप्ताह के भीतर जलडमरूमध्य खोलने की दिशा में कदम उठा सकता है।

सैन्य नेतृत्व ने भी अपनाया सख्त रुख

राष्ट्रपति के बयान के बाद ईरानी सैन्य प्रतिष्ठान की ओर से भी कड़ा संदेश सामने आया। ईरानी सशस्त्र बलों के वरिष्ठ प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेकारची ने सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा कि ईरान दुश्मन के सामने पीछे हटने का इरादा नहीं रखता और जवाब देने के लिए तैयार है।

इससे साफ है कि तेहरान फिलहाल सैन्य दबाव के साथ-साथ कूटनीतिक विकल्प को भी पूरी तरह बंद नहीं कर रहा है। पे़जेश्कियन ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान भी बातचीत और कूटनीति की संभावना का उल्लेख किया था, लेकिन बलपूर्वक शर्तें स्वीकार करने से इनकार किया था।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि होर्मुज को लेकर गतिरोध और परमाणु वार्ता की राह में अगला कदम क्या होगा। फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों में सख्ती बनी हुई है, जबकि मध्यस्थों के जरिए बातचीत की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।