
होर्मुज स्ट्रेट में जहाज। (File Photo)
US Iran Talk: अमेरिका और ईरान ईरान के बीच शांति समझौते को निर्णायक रूप देने को लेकर बातचीत जारी है। स्विट्जरलैंड में पहले राउंड की बातचीत हो गई है। इस बातचीत के बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया था कि ईरान के तेल व पेट्रोकेमिकल पर लगी रोक हटा दी गई है। कुछ जब्त की गई संपत्तियों को भी रीलिज किया जाएगा, जिससे ईरान में बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण और विकास की योजनाएं शुरू की जा सकें। इसी बीच होर्मुज को लेकर ईरानी वार्ताकार और संसद के स्पीकर बाघेर गालिबाफ ने दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है।
बाघेर गालिबाफ ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब पहले जैसा नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नियंत्रण ईरानी अधिकारियों के पास होगा। ईरानी इसका मैनेजमेंट करेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरानी अमेरिकियों पर कभी भी और कतई भरोसा नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए हम टेलिफोन हॉटलाइन की व्यवस्था भी कर रहे हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अगर लेबनान में किसी तरह की समस्या उत्पन्न होती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य में भी समस्या उत्पन्न हो सकती है। हॉटलाइन स्थापित करने को लेकर गालिबाफ ने कहा कि इसका मकसद उन मुद्दों को सुलझाना है, जिन पर अमेरिका को कोई आपत्ति हो या जिनके बारे में किसी जहाज को स्पष्टीकरण की आवश्यकता हो। जानकारी के अनुसार, बीते 24 घंटों में दो दर्जन से अधिक जहाजों ने इस तनाव भरे जलमार्ग को पार किया है।
शांतिवार्ता को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि पहले दौर की बातचीत अच्छी रही है। अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत की नींव अच्छी पड़ी है। शांति समझौते के MoU पर साइन करने के बाद होर्मजु जलडमरूमध्य को खोल दिया गया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी अमेरिका के नियंत्रण में है। अमेरिकी नेवी का बेड़ा अभी भी खाड़ी में मौजूद है। हम ईरान को कभी भी न्यूक्लियर हथियार बनाने नहीं देंगे।
उधर, तेल की सप्लाई बाधित होने का चीन पर भी बड़ा असर पड़ा है। चीन सप्लाई चेन को दुरुस्त रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। चीन ने आयात में कमी की है। स्ट्रेटिजिक ऑयल रिजर्व का उपयोग किया है। वहीं, ग्रीन एनर्जी का उत्पादन भी बढ़ाया है, लेकिन इन कोशिशों के बावजूद उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है।
एनर्जी थिंक टैंक 'एम्बर' के प्रिंसिपल डान वाल्टर ने कहा कि चीन के बचाव के प्रयासों के जरिए एशिया सहित दुनिया भर में कच्चे तेल के दाम में उछाल नहीं आया। चीन ने ग्लोबल इकॉनोमी को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं, बीते सोमवार को ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 78 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई। बता दें कि ईरान-अमेरिका युद्ध से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल थी। युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुका था।
थिंक टैंक ने कहा कि 1973 में अरब देशों के प्रतिबंध के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई 7 फीसदी घट गई थी। इस वजह से कीमतों में 134 फीसदी का उछाल आ गया था, जबकि इस युद्ध के चलते 14 फीसदी सप्लाई में आई, लेकिन कीमतों में उस स्तर का इजाफा नहीं हुआ। जबकि, कहा जा रहा था कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर देता हो तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर के पार जा सकती है। थिंक टैंक ने इसका कारण बताते हुए कहा कि चीन के निर्णयों व बचाव के तरीकों ने ग्लोबल इकॉनोमी को एक भारी-भरकम शॉक से बचाया। थिंक टैंक ने कहा कि अब दुनिया भर में कच्चे तेल के दाम के उतार चढ़ाव में चीन की नीति अहम भूमिका अदा करेगी।
Updated on:
23 Jun 2026 07:27 am
Published on:
23 Jun 2026 07:27 am
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