
Abbas Araghchi: होर्मुज पर ईरान का दांव, अमेरिका के जवाब का इंतजार! अराघची के बयान से फिर बढ़ा सस्पेंस (फोटो सोर्स: ANI)
Iran US Talks: ईरान और अमेरिका के बीच सीधे संवाद की जगह मध्यस्थों के जरिए संदेशों का सिलसिला तेज हो गया है। तेहरान को उम्मीद है कि वॉशिंगटन उसके प्रस्ताव पर जल्द आधिकारिक जवाब देगा। इस पूरे घटनाक्रम में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे अहम मुद्दा बना हुआ है, क्योंकि ईरान ने कुछ शर्तों के साथ इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की योजना सामने रखी है। कतर और पाकिस्तान के जरिए चल रही कूटनीतिक कोशिशें अब अगले कदम पर पहुंचती दिख रही हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान को उम्मीद है कि अमेरिका की ओर से उसके प्रस्ताव पर जवाब संभवतः मंगलवार तक मिल सकता है। उन्होंने बताया कि न्यूयॉर्क में कतर के मध्यस्थों के साथ फिर बातचीत हुई है। इन बैठकों में ऐसे नए विचार सामने आए, जिन्हें अब अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया जा रहा है।
अराघची के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान का प्रमुख उद्देश्य दुनिया के सामने क्षेत्रीय संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े सुरक्षा हालात पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना था। तेहरान का कहना है कि उसने समुद्री मार्ग खोलने के लिए एक व्यावहारिक प्रस्ताव रखा है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी।
ईरान पहले ही एक ऐसी रूपरेखा सामने रख चुका है, जिसके तहत अमेरिकी सहमति मिलने के बाद सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही गई है। इसके बदले तेहरान अमेरिकी सैन्य दबाव कम करने, प्रतिबंधों और आर्थिक मुद्दों पर राहत जैसे कदम चाहता है। ईरान का दावा है कि यह प्रस्ताव बातचीत को दोबारा शुरू करने का रास्ता भी खोल सकता है।
हालांकि, अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई थी। अमेरिकी पक्ष का जोर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ठोस बातचीत और उससे जुड़े आश्वासनों पर है। यही अंतर दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोमवार को पुष्टि की कि अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान से जुड़े मध्यस्थों के साथ बातचीत की है। हालांकि उन्होंने बैठक की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका मौजूदा संघर्ष में जीत हासिल करेगा और युद्ध समाप्त होने के बाद गैस की कीमतों में गिरावट आ सकती है।
दूसरी ओर, अराघची ने संकेत दिया है कि तेहरान कूटनीति का रास्ता खुला रखना चाहता है, लेकिन संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए भी तैयार है। यानी बातचीत की मेज और युद्ध की तैयारी दोनों विकल्प एक साथ खुले रखे गए हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने का असर तेल, गैस, समुद्री परिवहन और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि ईरान-अमेरिका के बीच चल रही मध्यस्थता केवल दोनों देशों का मामला नहीं रह गई है।
अब असली सवाल यह है कि वॉशिंगटन तेहरान की शर्तों पर क्या रुख अपनाता है। कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से संपर्क जारी है, लेकिन अंतिम समझौते के लिए दोनों पक्षों को होर्मुज, प्रतिबंधों और परमाणु मुद्दे पर किसी साझा रास्ते तक पहुंचना होगा।
Updated on:
29 Sept 2026 07:30 am
Published on:
29 Sept 2026 06:58 am
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