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इजरायल में किसी को बहुमत नहीं, फिर भी नेतन्याहू के पास सत्ता पाने के 5 रास्ते; कैसे पलट सकती है बाजी?

Benjamin Netanyahu: इजरायल चुनाव में किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला। ऐसे में बेंजामिन नेतन्याहू सरकार बनाने के लिए कौन से पांच रास्ते अपना सकते हैं?
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भारत

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Pratiksha Gupta

•

Updated: 30 Oct 2026, 10:58 AM IST

Benjamin Netanyahu news

इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Photo-IANS)

Israel Election Results: इजरायल के आम चुनाव में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। 120 सदस्यों वाली संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत है, लेकिन बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान है। ऐसे में नेतन्याहू के सामने सरकार बनाने के पांच संभावित रास्ते हैं। इनमें विपक्षी दलों के साथ गठबंधन से लेकर दूसरी बार चुनाव कराने तक के विकल्प शामिल हैं।

नेतन्याहू के सामने सरकार बनाने के 5 रास्ते हैं-

विपक्षी दलों के साथ मिलकर बना सकते हैं एकता सरकार

नेतन्याहू की लिकुड पार्टी संसद में सबसे बड़ी पार्टी है। ऐसे में वह विपक्ष के कुछ मध्यमार्गी और दक्षिणपंथी दलों के साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं। इस गठबंधन में गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी, एविग्डोर लिबरमैन की इजरायल आवर होम और नफ्ताली बेनेट का टुगेदर गुट शामिल हो सकते हैं। इन दलों के साथ आने पर गठबंधन के पास 66 सीटें होंगी। यह बहुमत के आंकड़े से पांच ज्यादा है।

हालांकि, इसके लिए नेतन्याहू को अपने मौजूदा अति-दक्षिणपंथी और अति-रूढ़िवादी सहयोगियों का साथ छोड़ना पड़ सकता है।वहीं, विपक्षी दलों ने चुनाव में नेतन्याहू को सत्ता से हटाने का वादा किया था। ऐसे में उनके साथ सरकार बनाना उनके लिए भी आसान नहीं होगा। अगर दूसरे विकल्प काम नहीं करते या ईरान के साथ फिर संघर्ष शुरू होता है, तो एकता सरकार का विकल्प सामने आ सकता है।

प्रधानमंत्री पद को लेकर हो सकता है समझौता

नेतन्याहू और विपक्षी गठबंधन के बीच प्रधानमंत्री पद को लेकर भी समझौता हो सकता है। इसके तहत दोनों पक्षों के नेता तय समय के लिए बारी-बारी से प्रधानमंत्री बन सकते हैं। नेतन्याहू की पार्टी सबसे बड़ी है और उनका गठबंधन भी सबसे आगे है। ऐसे में उनके लिए प्रधानमंत्री पद साझा करना आसान नहीं होगा। वहीं दूसरी तरफ आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों को भी अपने चुनावी वादे से पीछे हटना पड़ेगा। उन्होंने मतदाताओं से नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की बात कही थी।

विपक्षी सांसदों को अपने समर्थन में ला सकते हैं नेतन्याहू

नेतन्याहू के पास विपक्षी गठबंधन में सेंध लगाने का विकल्प भी है। चुनाव में उनके गठबंधन की सीटें पिछली 64 से घटकर 53 रह गई हैं। बहुमत तक पहुंचने के लिए उन्हें विपक्षी खेमे के कुछ सांसदों का समर्थन हासिल करना होगा। नेतन्याहू पहले भी विपक्षी दलों के सदस्यों को अपने साथ लाने की कोशिश कर चुके हैं। 2022 के चुनाव से पहले भी उन्होंने ऐसा किया था और बाद में सत्ता में वापसी की थी। हालांकि, इस बार विपक्षी गठबंधन की स्थिति मजबूत है। ऐसे में उसे तोड़कर जरूरी संख्या जुटाना उनके लिए चुनौती होगी।

अरब दलों के समर्थन से विपक्ष बना सकता है सरकार

विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट भी सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं। अगर राष्ट्रपति इसाक हर्जोग उन्हें मौका देते हैं, तो वह याशर के साथ टुगेदर, डेमोक्रेट्स और इजरायल आवर होम जैसे दलों को जोड़ सकते हैं। इस गठबंधन के पास 48 सीटें होंगी। अगर अरब दल राअम और ज्वाइंट लिस्ट बाहर से समर्थन देते हैं, तो कुल संख्या 67 तक पहुंच सकती है। इस तरह आइजेनकोट बहुमत का आंकड़ा पार कर सकते हैं। इसके लिए अरब दलों का सरकार में शामिल होना जरूरी नहीं होगा।

हालांकि, इस विकल्प के सामने राजनीतिक चुनौती भी है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजरायल में अरब अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर राजनीतिक माहौल संवेदनशील हो गया है। नेतन्याहू चुनाव प्रचार के दौरान अरब दलों के समर्थन को मुद्दा बनाते रहे हैं। फिलहाल केंद्र-वामपंथी डेमोक्रेट्स पार्टी ने ही सार्वजनिक रूप से अरब दलों को सरकार में शामिल करने की बात कही है। वहीं दूसरी तरफ, राअम और ज्वाइंट लिस्ट ने आइजेनकोट के खेमे के साथ सहयोग करने की इच्छा जताई है। राअम 2021 में नफ्ताली बेनेट की सरकार में शामिल हुई थी। यह पहला मौका था, जब किसी स्वतंत्र अरब पार्टी को इजरायल की गठबंधन सरकार में जगह मिली थी। हालांकि, वह सरकार करीब 18 महीने बाद गिर गई थी।

सरकार नहीं बनी तो फिर हो सकते हैं चुनाव

अगर कोई भी दल या गठबंधन सरकार बनाने में सफल नहीं होता है, तो इजरायल में फिर से चुनाव कराए जा सकते हैं। औपचारिक अंतिम नतीजे प्रकाशित होने के बाद राष्ट्रपति इसाक हर्जोग सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। इसके बाद वह उस नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, जिसे वह बहुमत जुटाने में सक्षम मानते हैं। अगर पहला उम्मीदवार नाकाम रहता है, तो दूसरे नेता को मौका मिल सकता है। इसके बाद भी सरकार नहीं बनती है, तो नेसेट किसी अन्य उम्मीदवार को नामित कर सकती है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए करीब 100 दिनों का टाइम है। इस दौरान सरकार नहीं बन पाने पर नए चुनाव का रास्ता खुलेगा। राष्ट्रपति हर्जोग ने राजनीतिक दलों से एक और चुनाव से बचने की अपील की है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि दलों के बीच कोई समझौता होता है या इजरायल को फिर मतदान करना पड़ता है।