31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जिस मीटिंग में एक ही मेज पर बैठे रुबियो और लावरोव, वहां जयशंकर बोले- सेना नहीं, बातचीत से निकालें रास्ता

अटलांटा में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर ने कहा, सैन्य समाधान से नहीं सुलझेंगी वैश्विक चुनौतियां। आतंकवाद पर भी दी दो टूक चेतावनी।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Pushpankar Piyush

•

Updated: 31 Oct 2026, 7:14 AM IST

Marco Rubio India Visit news

एस. जयशंकर से मिले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो(फोटो-IANS)

G20 Foreign Ministers' Meeting: जॉर्जिया के अटलांटा में आयोजित G20 की विदेश मंत्रियों की बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य तरीकों से नहीं निकाला जा सकता है। ऐसे मामलों को सुलझाने के लिए कूटनीति को आगे लाना चाहिए। भारत की तरफ से यह बयान तब आया है, जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष जारी है। इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव शामिल है।

आपूर्ति श्रृंखलाओं को हथियार बनाने का काम बंद करना चाहिए

जयशंकर ने मीटिंग के दौरान कहा कि बाजारों में सस्ते माल की भरमार (मार्केट फ्लडिंग), आपूर्ति श्रृंखलाओं को हथियार बनाना और सामानों के बाजार पहुंच से वंचित किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजारों में जोखिम घटाना और वैकल्पिक कनेक्टिविटी नेटवर्क बनाना जरूरी है। उन्होंने आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि रणनीतिक गणनाओं के चलते आतंकवाद के खतरों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह जोखिम भरा खेल है। इसे अपनाने वालों को भी यह डस चुका है।

नागरिक जहाजरानी और नाविकों पर हमलों का सबसे अधिक असर ग्लोबल साउथ पर

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि नागरिक जहाजरानी और नाविकों पर हमलों का सबसे अधिक असर ग्लोबल साउथ पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि फरवरी में पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से कम से कम 22 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है, जिनमें 14 नाविक शामिल हैं। एस जयशंकर अटलांटा बैठक के दौरान जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के शीर्ष राजनयिकों के साथ क्वाड बैठक में भी भाग लेंगे। यह इस वर्ष आयोजित दूसरी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक है, जो अगले महीने फिलीपींस में प्रस्तावित नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले हो रही है। अटलांटा में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद जयशंकर 1 से 4 नवंबर तक होने वाली राष्ट्रमंडल सरकार प्रमुखों की बैठक (CHOGM) में भाग लेने के लिए एंटीगुआ और बारबुडा रवाना होंगे।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्या कहा?

वहीं, जॉर्जिया में विदेश मंत्रियों के सम्मलेन को संबोधित करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि हम आपस में जुड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक संकटों की एक श्रृंखला का सामना कर रहे हैं, जिनमें से कई वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की बुनियादी नींव, वैश्विक ऊर्जा और खाद्य बाजारों, आपूर्ति श्रृंखला, व्यापार और यहां तक कि नौवहन की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने कहा कि हम अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत अपने सहयोगियों की हितों की रक्षा भी कर रहे हैं। खास बात यह है कि जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो सत्र को संबोधित कर रहे थे। उस दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी मौजूद थे, जो मेक्सिको और सऊदी अरब के प्रतिनिधियों के बीच बैठे थे।