
Nepal First Woman Helicopter Captain (Photo-IANS/instagram-priyathehelicopterpilot)
Nepal Flood Priya Adhikari: काठमांडू। गड़गड़ाते रोटर, रेडियो पर गूंजती पायलटों की लगातार आवाजें और नीचे दलदल में तब्दील हो चुकी जमीन… नेपाल-तिब्बत सीमा पर प्राकृतिक आपदा के बीच यह दृश्य अब आम हो चुका है। पांच-छह हेलिकॉप्टर एक साथ तिमुरे गांव के सीमित लैंडिंग क्षेत्र में उतरने की जद्दोजहद कर रहे हैं। हवा में हर पल खतरा मंडरा रहा है, लेकिन इस तबाही के बीच एक महिला पायलट की सूझबूझ और जांबाजी सैकड़ों लोगों के लिए उम्मीद बन गई है। ये हैं नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन 40 वर्षीय प्रिया अधिकारी।
नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। इस बीच कैप्टन प्रिया ने महज छह दिनों में करीब 100 रेस्क्यू मिशन उड़ाए और कई लोगों को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई।
कैप्टन प्रिया ने सीएनएन के पत्रकार एंडरसन कूपर से बातचीत में कहा कि उन्होंने इससे पहले कभी ऐसी तबाही नहीं देखी। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित तिमुरे गांव के ऊपर करीब 20 हेलिकॉप्टर लगातार राहत और बचाव अभियान में जुटे हुए हैं। इलाके में बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।
प्रिया के मुताबिक, कई बार एक ही जगह पर पांच या छह हेलिकॉप्टरों को उतरकर लोगों को बाहर निकालना पड़ता है। ऐसे में सभी पायलटों के बीच रेडियो पर लगातार समन्वय जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि चुनौती केवल लोगों को हेलिकॉप्टर में बैठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित लैंडिंग करना भी बेहद मुश्किल है। कई जगहों पर मोटी कीचड़ जमा होने के कारण हेलिकॉप्टर को जमीन पर उतारकर इंजन बंद करना संभव नहीं होता। ऐसे में पायलटों को रेस्क्यू के दौरान लगातार पावर बनाए रखनी पड़ती है।
प्रिया अधिकारी के लिए सबसे मुश्किल पल वे होते हैं, जब हेलिकॉप्टर से नीचे बाढ़ की तबाही दिखाई देती है। उन्होंने तिमुरे के ऊपर उड़ान के दौरान बाढ़ के बाद कई शवों को बिखरा हुआ देखा। प्रिया ने बताया कि जिन लोगों को वह बचाकर लाती हैं, वे उनके रिश्तेदार नहीं हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षित देखकर भावनाएं जरूर उमड़ आती हैं। उन्होंने कहा कि जब वह हेलिकॉप्टर लेकर किसी जगह उतरती हैं तो लोग उम्मीद के साथ हाथ हिलाते हैं। ऐसे में उनके लिए सबसे संतोषजनक पल वह होता है, जब वह उन्हें यह कह पाती हैं कि 'आप बच गए हैं।' उनके मुताबिक, बचे हुए लोगों के चेहरे पर दिखाई देने वाली मुस्कान कई दिनों की थकान को भुला देती है।
प्रिया अधिकारी का एविएशन में आने का सफर भी काफी अलग रहा है। उन्होंने पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई की और शुरुआती दौर में केबिन क्रू के तौर पर काम किया। एक बार हेलिकॉप्टर की जॉय राइड के बाद उनकी दिलचस्पी एविएशन क्षेत्र में बढ़ी और उन्होंने पायलट बनने का फैसला किया। इसके बाद वह हेलिकॉप्टर पायलट की ट्रेनिंग के लिए फिलीपींस गईं। जरूरी फ्लाइंग आवर्स पूरे करने के बाद उन्होंने 2017 में पूर्णकालिक हेलिकॉप्टर पायलट के तौर पर काम शुरू किया।
प्रिया ने आगे चलकर हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू फ्लाइंग में विशेषज्ञता हासिल की। वह हिमालय में कई सर्च एंड रेस्क्यू अभियानों का हिस्सा रही हैं और माउंट एवरेस्ट पर घायल पर्वतारोहियों को बचाने के लिए करीब 6,200 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर चुकी हैं।
करियर की शुरुआत में उन्हें इस संदेह का भी सामना करना पड़ा कि एक महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन नहीं बन सकती। लेकिन उन्होंने इस धारणा को पीछे छोड़ते हुए नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन बनने का मुकाम हासिल किया।
Updated on:
01 Sept 2026 02:53 pm
Published on:
01 Sept 2026 02:49 pm
