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Nepal Flood: बाढ़ में बहा नेशनल हाईवे फिर से खुला, सर्च अभियान भी हुआ तेज

Nepal-China Highway: नेपाल में बाढ़ के बाद अब हाइवे और सड़क खुलने लगे हैं। इसी बीच नेपाल सीमा से सटे G216 हाईवे को फिर से खोल दिया गया है। चीनी और नेपाली बचावकर्मी बाढ़ और भूस्खलन के बाद लापता हुए सैकड़ों लोगों की तलाश कर रहे हैं।
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China-Nepal border

चीन नेपाल बोर्डर (फोटो-ANI)

Nepal Flash Flood: नेपाल में आई बाढ़ की वजह से बंद हुए सड़क और हाइवे अब खुलने लगे हैं। इसी बीच दक्षिण में नेपाल की सीमा से सटे केरूंग (ग्यिरोंग) बॉर्डर को जोड़ने वाले एकमात्र हाइवे को चीन ने फिर से पूरी तरह खोल दिया है। यह मार्ग चीन और नेपाल के बीच सीमा पार आवागमन और व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण हाइवे है। 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने की वजह से चीन-नेपाल सीमा से सटे नदी इलाके में बाढ़ आ गई थी। इसके बाद मलबा और भूस्खलन से G216 नेशनल हाईवे के कई हिस्से बह गए थे। इसके बाद से ही बचाव दल इस हाईवे को फिर से तैयार करने के काम में दिन-रात जुटे हुए थे।

हाइवे खुलने से राहत कार्य में तेजी आई

चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी (CCTV) के मुताबिक, बुधवार को हाइवे खुलने के बाद लोगों की तलाश और बचाव राहत का काम तेज हो गया। हाइवे खुलने से पहले चीन अग्रिम मोर्चे पर डटे बचावकर्मियों तक हवाई मार्ग (एयरड्रॉप) से जरूरी उपकरण और सामान पहुंचा रहा था। वहीं, सेना के जवान लापता लोगों की तलाश के लिए आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे थे।

आधुनिक उपकरणों की ली मदद

ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी के मुताबिक, दबे हुए हाइवे पर पहले चीन का बॉर्डर इंस्पेक्शन कॉम्प्लेक्स हुआ करता था, लेकिन बाढ़ के कारण वहां भारी मात्रा में मलबा जमा हुआ था। जिसे बड़ी संख्या में भारी एक्सकेवेटर मशीनें के जरिए हटा दिया गया है। इसके साथ ही लाइफ-डिटेक्शन डिवाइस और स्निफर डॉग्स के साथ बचाव दलों ने बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में लोगों को ढूंढ़ा।

बाढ़ का खतरा हुआ कम

रिपोर्ट के मुताबिक चीनी अधिकारियों का कहना है लगातार हो रही बारिश और दुर्गम इलाके के कारण राहत और बचाव काम में काफी मुश्किलें आईं। क्योंकि टीमों को खिसकती चट्टानों और तेज बहती नदी के बीच एक संकरी घाटी में काम करना पड़ रहा था। इसके अलावा, प्रशासन ऊपर की ओर बनी झीलों पर भी लगातार नजर बनाए हुए था, जिनके फटने से फिर बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। लेकिन अब चीनी अधिकारियों ने बताया कि झीलों से पैदा हुआ बाढ़ का खतरा काफी कम हो गया है, लेकिन भूस्खलन की आशंका अभी भी बनी हुई है।