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‘फॉर्म 47 सरकार’ कहकर पाकिस्तान पर क्यों निशाना साधता है भारत? जानिए चुनावी विवाद की पूरी कहानी

पाकिस्तान की राजनीति में 'फॉर्म 47 सरकार' शब्द क्यों चर्चा में है? जानिए फॉर्म 45 और फॉर्म 47 में अंतर, 2024 के आम चुनावों में धांधली के आरोप और शहबाज शरीफ सरकार से जुड़े विवाद की पूरी कहानी।
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भारत

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Anurag Animesh

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Updated: 26 Oct 2026, 2:00 AM IST

Pakistan Form 47 Government news

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ(फोटो-IANS)

Pakistan Form 47 Government: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शब्दों के चयन का अपना कूटनीतिक वजन होता है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के एक हालिया सत्र में भारतीय कूटनीतिज्ञों ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार करते हुए उसे सीधे तौर पर 'फॉर्म 47 सरकार' कहकर संबोधित किया। पहली नजर में यह किसी साधारण आधिकारिक दस्तावेज का नाम लग सकता है, लेकिन आज के पाकिस्तान में यह शब्द किसी राजनीतिक तंज से कम नहीं है। भारत के इस कूटनीतिक हथियार ने वैश्विक समुदाय के सामने पाकिस्तानी हुकूमत की लोकतांत्रिक साख को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

यूएन में भारत ने रखा जख्म पर हाथ

हाल में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में जब पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने भारत के आंतरिक मामलों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को उठाने की कोशिश की, तो भारत ने पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील सियासी जख्म पर वार किया। भारतीय राजनयिकों ने कड़ा प्रहार करते हुए दो टूक कहा कि जो हुकूमत खुद अपने ही नागरिकों का जनादेश चुराकर 'फॉर्म 47' की धांधली पर टिकी है और सेना के इशारों पर कठपुतली की तरह नाचती है, उसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

दो फॉर्म के बीच ऐसे बदली सत्ता

फॉर्म 45: चुनाव के दिन हर पोलिंग स्टेशन पर गिनती पूरी होने के बाद पीठासीन अधिकारी यह फॉर्म भरता है। इस पर पोलिंग एजेंटों के हस्ताक्षर होते हैं।

फॉर्म 47: इस फॉर्म में किसी निर्वाचन क्षेत्र के सभी पोलिंग स्टेशनों से मिले फॉर्म 45 के आंकड़ों को जोड़कर कुल वोटों का हिसाब तैयार किया जाता है। इसके आधार पर निर्वाचन क्षेत्र के समेकित और अनौपचारिक चुनावी नतीजे घोषित किए जाते हैं।

रातों-रात बन गई 'चोरी की सरकार'


2024 के पाकिस्तानी आम चुनावों में इमरान खान (पीटीआइ) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों को फॉर्म 45 के अनुसार स्पष्ट बढ़त हासिल थी। आरोप है कि रात के अंधेरे में खेल बदला गया, पोलिंग बूथों से एजेंटों को खदेड़ा गया और जब 'फॉर्म 47' जारी हुआ, तो हारे हुए उम्मीदवारों को विजेता घोषित कर दिया गया। इसी सैन्य हस्तक्षेप और चुनावी सेंधमारी से बनी शहबाज शरीफ की सरकार को जनता आज हिकारत से 'फॉर्म 47 की सरकार' यानी 'चोरी की सरकार' कहती है।