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यूक्रेन से लड़ने वाले सैनिकों का हौसला बढ़ाने के लिए पुतिन का अजब-गजब कदम, बॉर्डर पर भेजी 600 साल पुराने राजकुमार की हड्डियां

Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध में सैनिकों का हौसला बढ़ाने के लिए मॉस्को ऑर्थोडॉक्स चर्च ने 600 साल पुराने राजकुमार दिमित्री डोंस्कॉय के दाहिने हाथ की हड्डी डोनेट्स्क भेजी है।
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भारत

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Mukul Kumar

Sep 10, 2026

Russia News

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। (Photo-X@mfa_russia)

Russia War Latest Update: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को की ऑर्थोडॉक्स चर्च ने एक ऐसा कदम उठाया है जो युद्ध के मैदान में सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए काफी चर्चा में है। मध्ययुगीन रूसी राजकुमार दिमित्री डोंस्कॉय के दाहिने हाथ की हड्डी का एक टुकड़ा अब डोनेट्स्क भेज दिया गया है।

चर्च का कहना है कि यही वह हाथ था जिससे उन्होंने 1380 में कुलिकोवो की लड़ाई में मंगोलों को हराया था। अब यह अवशेष रूसी सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा।

डोनेट्स्क क्षेत्र पर पूरा कब्जा करने की कोशिश में रूस

बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध अब पांचवें साल में पहुंच गया है। इसके अंत के लिए कूटनीतिक कोशिशें अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं दे पाई हैं। रूसी सेना डोनेट्स्क क्षेत्र पर पूरा कब्जा करने की कोशिश में है।

चर्च ने साफ कहा कि पवित्र कमांडर का यह अवशेष सैनिकों की आत्मा को मजबूत करेगा। छोटे सुंदर डिब्बे में रखे गए इस अवशेष को कांच के नीचे सुरक्षित करके पूरे मोर्चे पर विभिन्न इकाइयों को दिखाया जाएगा।

जुलूस निकालकर अवशेषों को ले जाया गया

पिछले दिनों मास्को में इन अवशेषों को सड़कों पर जुलूस निकालकर ले जाया गया। डोनेट्स्क में मंगलवार को द्वितीय विश्व युद्ध के स्मारक पर एक समारोह हुआ। वहां राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी सहयोगी सर्गेई किरियेंको, सैन्य कमांडर और रूस द्वारा नियुक्त क्षेत्रीय अधिकारी मौजूद थे।

उन्होंने अवशेष को चूमा और क्रॉस का निशान बनाया। डोनेट्स्क और मारियुपोल के मेट्रोपॉलिटन व्लादिमीर ने कहा कि सैन्य कर्मियों और डोनबास के लोगों दोनों को ऊपर से शक्ति और संतों का आशीर्वाद चाहिए।

खुद इन अवशेषों को देखने गए थे पुतिन

पुतिन खुद अगस्त में क्रेमलिन के कैथेड्रल ऑफ द आर्चेंजल में इन अवशेषों को देखने गए थे। उन्होंने इन्हें अनोखी और अद्भुत खोज बताया। दिमित्री डोंस्कॉय 1389 में दिवंगत हुए थे। रूसी राष्ट्रवादी उन्हें मंगोल गोल्डन होर्ड के खिलाफ जीत के लिए बहुत सम्मान देते हैं।

1988 में चर्च ने उन्हें संत घोषित किया था। द्वितीय विश्व युद्ध में चर्च द्वारा वित्त पोषित सोवियत टैंक कॉलम का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया था। इस पूरे प्रयास को देशभक्ति बढ़ाने वाला बताया जा रहा है।