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ताइवान के आसपास फिर दिखी चीनी सेना की हलचल, 1 विमान और 15 जहाजों की मौजूदगी दर्ज

Chinese Military Activity: ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने चीन के 1 सैन्य विमान और 15 जहाजों की गतिविधि दर्ज की है। इनमें से एक विमान ताइवान के एयर डिफेंस जोन में भी प्रवेश कर गया, जिसके बाद ताइवान की सेना ने स्थिति पर नजर रखते हुए जवाबी कार्रवाई की।

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भारत

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Harshita Saini

Jun 09, 2026

Chinese Military Activity

प्रतीकात्मक तस्वीर

Taiwan China Tension: ताइवान के आसपास एक बार फिर चीन की सैन्य गतिविधियां दर्ज की गई हैं। मंगलवार को ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि क्षेत्र में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) का एक विमान, चीन की नौसेना के छह जहाज और नौ सरकारी जहाज सक्रिय पाए गए। क्षेत्र में ताइवान की सेना ने इन सभी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी और हालात के अनुसार जवाबी कदम उठाए। मंत्रालय का कहना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा को देखते हुए हर हलचल पर बारीकी से निगरानी की जा रही है।

एयर डिफेंस जोन में घुसा चीनी विमान

रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि चीन का एक विमान ताइवान के दक्षिण-पूर्वी एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) में प्रवेश कर गया था। ताइवान की सेना ने विमान और जहाजों की गतिविधियों को ट्रैक किया और पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी। इससे एक दिन पहले भी सोमावार को ताइवान ने अपने आसपास चीनी सैन्य गतिविधियों की जानकारी दी थी।

सोमवार को भी दर्ज की गई थी गतिविधि

सोमवार को ताइवान के आसपास दो चीनी विमान, छह नौसैनिक जहाज और सात सरकारी जहाज देखे गए थे। उस समय दोनों विमान ताइवान के पूर्वी ADIZ में एंटर हुए थे। दूसरी ओर, ताइवान अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की कोशिशों में भी जुटा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ताइवान की पहली स्वदेशी पनडुब्बी हाल ही में नए समुद्री परीक्षणों के लिए काओह्सियुंग बंदरगाह से रवाना हुई। इस दौरान पनडुब्बी को पानी के अंदर चलाने और गोता लगाने से जुड़े कई जरूरी टेस्ट किए गए। बताया जा रहा है कि यह पनडुब्बी का 15वां समुद्री परीक्षण और नौवां अंडरवॉटर टेस्ट था।

चीन और ताइवान के बीच तनातनी की वजह

चीन और ताइवान के बीच विवाद कई सालों पुराना है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। यह बात चीन की नीतियों, कानूनों और बयानों में नजर आती है। दूसरी ओर, ताइवान अपनी अलग सरकार, सेना और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ स्वतंत्र रूप से काम करता है।

इसी वजह से ताइवान की स्थिति को लेकर दुनिया भर में लंबे समय से बहस चल रही है। कुछ देश चीन के दावे का समर्थन करते हैं, जबकि कई देश ताइवान के साथ अलग संबंध भी बनाए रखते हैं। इतिहास की बात करें तो यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (USI) के अनुसार चीन का दावा 1683 से जुड़ा है, जब चिंग राजवंश ने मिंग वफादार नेता कोक्सिंगा (Koxinga) को हराकर इस द्वीप फर कब्जा कर लिया था।