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ट्रंप के बेटों की कंपनी अब पाकिस्तान को बेचेगी लड़ाकू ड्रोन, मुनीर की ‘दोस्ती’ लाई रंग

ट्रंप के बेटों की हिस्सेदारी वाली कंपनी पावरस ने पाक सेना के साथ एमओयू साइन किया। आसिम मुनीर की पहल पर लड़ाकू ड्रोन की आपूर्ति होगी। जानें पूरे सौदे की डिटेल।
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ट्रंप के बेटों की कंपनी पाकिस्तानी सेना को बेचेगी लड़ाकू ड्रोन, photo source@ChatGpt

Pakistan Combat Drones Deal: अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ नजदीकियां बढ़ाने की पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की कोशिशों का असर अब दिख रहा है। अमेरिकी ड्रोन कंपनी पावरस ने पाक सेना के साथ एक एमओयू साइन किया है। इसके तहत कंपनी पाक सेना को लड़ाकू ड्रोन की आपूर्ति करेगी।

इस कंपनी में राष्ट्रपति ट्रंप के दो बेटों डॉनल्ड ट्रंप जूनियर ओर एरिक ट्रंप की हिस्सेदारी एक इनवेस्टमेंट फंड के जरिए है। इस रक्षा सौदे की कीमत का अभी खुलासा नहीं किया गया है। कंपनी के को-फाउंडर वेलिकोविच के अनुसार इस डील का उद्देश्य एक जॉइंट टेक्नोलॉजी साझेदारी बनाना है। इसमें अमेरिका- पाकिस्तान की बेहतरीन टेक्नोलॉजी को एक साथ लाया जाएगा।

सौदे की रकम का अभी खुलासा नहीं

इस रक्षा सौदे की कीमत का अभी तक खुलासा नहीं किया गया है। न तो कंपनी की ओर से और न ही पाकिस्तानी सेना की ओर से इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की गई है कि डील में कितने ड्रोन शामिल होंगे या इसकी कुल लागत क्या होगी।

पावरस कंपनी के को-फाउंडर वेलिकोविच के अनुसार, इस डील का उद्देश्य एक जॉइंट टेक्नोलॉजी साझेदारी बनाना है। उनका कहना है कि इसमें अमरीका और पाकिस्तान की बेहतरीन तकनीक को एक साथ लाया जाएगा, ताकि दोनों देशों की रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को नया आयाम दिया जा सके।

आसिम मुनीर की कोशिशों का नतीजा

यह एमओयू ऐसे समय पर सामने आया है जब पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ संबंधों को मजबूत करने की कोशिश में जुटे रहे हैं। इस डील को उनकी इन्हीं कोशिशों के परिणाम के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे पाकिस्तान को अमेरिकी रक्षा तकनीक तक पहुंच मिलने की उम्मीद है। पाकिस्तान इस सौदे को अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रहा है, जबकि अमेरिकी पक्ष इसे द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का माध्यम बता रहा है।

ट्रंप परिवार के कारोबारी हितों पर उठ सकते हैं सवाल

चूंकि इस डील से जुड़ी कंपनी में राष्ट्रपति ट्रंप के परिवार की वित्तीय हिस्सेदारी है, इसलिए यह मामला अमेरिका में हितों के टकराव को लेकर बहस का विषय बन सकता है। आने वाले समय में इस डील की शर्तों, इसकी रकम और इसके रणनीतिक असर को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।