इस मस्जिद का निर्माण 1749 में सैयद शाजी बाबा ने कराया था जिसका पक्का निर्माण 1906 में हुआ। 1857 की क्रान्ति में इस मस्जिद में रुहेलखण्ड के क्रांतिकारी अक्सर एकत्र होते थे और अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति तैयार करते थे।इन योजनाओं को बनाने में प्रमुख रूप से नवाब खान बहादुर खां, दीवान शोभाराम और बरेली कॉलेज के शिक्षक मौलवी महमूद अहसन, फारसी शिक्षक कुतुबशाह और कॉलेज के कई राष्ट्रवादी छात्र सम्मिलित होते थे। नवाब खान बहादुर खां व सूबेदार बख्त खां के मध्य कई मीटिंगों के बाद तय हो पाया कि अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति की जानी है।