ऐसे थे देश के हालात
आगरा के वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना उन दिनों की याद को ताजा कर बताते हैं कि Kargil war के दौरान हर भारतीय के मन में बस एक ही चाह थी कि भारत पाकिस्तान को धूल चटा दे। छोटी दुकानों से लेकर गली, मोहल्ले और चौराहों पर लोगों के बीच कारगिल युद्ध की ही चर्चा चलती रहती थी। देशभर से न जाने कितनी बहनों ने बॉर्डर पर तैनात सिपाहियों को राखियां भेजकर उनकी रक्षा के लिए कामना की थी। लोग हर समय टीवी पर नजर गड़ा कर बैठे रहते थे। उस समय शहीदों के पार्थिव शरीर लाने के लिए पहली बार एयरकंडीशन ताबूतों का इस्तेमाल किया गया था। शहीदों के पार्थिव शरीर हवाई जहाज से आया करते थे। जब भी किसी जवान का शव उसके शहर या गांव पहुंचता, हजारों की संख्या में लोग उसे सलामी देने पहुंच जाते थे। हर शख्स के मन में देशभक्ति की ज्वाला धधक रही थी।