
आगरा की जयपुर हाउस कॉलोनी पर राजस्थान सरकार का दावा (PC: Official Website)
Rajasthan Agra Property Dispute:उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बीच संपत्तियों के मालिकाना हक को लेकर एक नया और बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। राजस्थान सरकार ने आगरा की प्रसिद्ध जयपुर हाउस कॉलोनी और उससे जुड़ी कई ऐतिहासिक संपत्तियों पर अपना हक जताया है। इस बड़े दावे के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है और स्थानीय प्रशासन 74 साल पुराने राजस्व रिकॉर्ड को खंगालने में जुट गया है।
राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार को एक पत्र भेजा गया जिसमें इन संपत्तियों पर अधिकार की मांग की गई है। इस दावे का मुख्य आधार साल 1952 में हुआ ऐतिहासिक विलय समझौता है जिसके आर्टिकल 6(2)(C) का हवाला दिया गया है। राजस्थान का तर्क है कि इस समझौते के तहत पूर्व जयपुर रियासत की जो भी संपत्तियां राजस्थान की मौजूदा सीमा से बाहर स्थित थीं, उन पर राजस्थान राज्य का अधिकार माना गया था। इस दावे के समर्थन में 16 फरवरी, 1952 का राजपत्र भी उत्तर प्रदेश सरकार को उपलब्ध कराया गया है जिसमें आगरा समेत कई शहरों में जयपुर रियासत की संपत्तियों का ब्योरा दर्ज होने की बात कही गई है।
राजस्थान सरकार के दस्तावेजों के अनुसार आगरा के जयपुर हाउस क्षेत्र में रियासत की दो ऐतिहासिक कोठियां, करीब 100 बीघा जमीन, सदाशिव मनःकामेश्वर मंदिर से जुड़ा क्षेत्र और सड़क की एक प्रमुख पट्टी शामिल है। 7 दशक से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद अब यह जांच की जा रही है कि इन संपत्तियों की मौजूदा भौतिक स्थिति क्या है और इनमें से कितनी जमीन या भवन अभी भी सरकारी रिकॉर्ड में रियासत के नाम पर दर्ज हैं।
इस पत्र के मिलने के बाद उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। राजस्व परिषद के निर्देश पर आगरा के जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त, आगरा विकास प्राधिकरण के सचिव और SDM सदर को पुराने अभिलेखों की जांच के कड़े निर्देश दिए हैं। नगर निगम, एडीए और तहसील स्तर की संयुक्त टीमें ब्रिटिश काल और आजादी के बाद के पुराने राजस्व रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।
जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि 1952 के बाद इन संपत्तियों में क्या क्या बदलाव हुए हैं, कितनी जमीनों की बिक्री हुई है, किन हिस्सों पर निजी या सरकारी निर्माण हो चुका है और वर्तमान में इन पर किसका कब्जा है।
यह पूरा मामला सिर्फ आगरा तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसका दायरा अन्य जिलों तक भी फैला हुआ है। राजस्थान सरकार ने मथुरा, प्रयागराज और वाराणसी में भी जयपुर रियासत से जुड़ी संपत्तियों पर अपने मालिकाना हक का दावा किया है।
इन सभी जिलों से पुराने रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं। एडीएम प्रशासन आजाद भगत सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर संबंधित विभागों से अभिलेख मांगे गए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी जिसके बाद उच्च स्तर पर कानूनी राय लेकर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
Updated on:
15 Sep 2026, 6:41 PM IST
Published on:
15 Sep 2026, 6:41 PM IST
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