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आगरा। सरकार इलाज को सस्ता करने के लिए लगातार दावे कर रही हैं। लेकिन, सस्ते इलाज पर डॉक्टर्स और दवाएं भारी पड़ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में आज भी ऐसी सुुविधाएं नहीं हैं जो निजी चिकित्सकों के पास हैं। मरीज की गाढ़ी कमाई इलाज में खर्च हो रही है। मोदी सरकार के चार साल के बाद भी एसएन मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी नहीं हो सकी है।
मोदी और योगी सरकार ने एसएन मेडिकल कॉलेज को एम्स जैसा बनाने का दावा किया था। सरकारों के कार्यकाल में एसएन मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं की बढ़ोत्तरी के बजाए उनका टोटा पड़ने लगा। सुपरस्पेशलिटी बिल्डिंग की सुविधाएं हैंडओवर होने से पहले की धराशायी होने लग गईं। एसी खराब हो गए, पंखे भी नहीं हैं, ऐसे में मरीजों की हालत खस्ता हो गई। आगरा मेडिकल हब बनने जा रहा है, यहां विश्व विख्यात चिकित्सक मौजूद हैंं। लेकिन, सस्ते इलाज के लिए मरीजों को आज भी सरकारी अस्पताल का ही सहारा है।
निजी अस्पताल से उम्मीद खत्म होने के बाद आता है मेडिकल कॉलेज
सरकारी अस्पतालों में इलाज और उपचार की ऐसी सुविधाएं मौजूद नहीं है। जो निजी अस्पतालों में मौजूद हैं। मरीज निजी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचता है। लेकिन, महंगे इलाज के बाद जब कुछ नहीं बचता तो एसएन में इलाज को मजबूर होता है। आगरा में ऐसे कई मामले रोजाना सामने आते हैं। एत्मादपुर निवासी कैंसर के मरीज रामसिंह ने ट्रांसयमुना के एक अस्पताल में इलाज कराया लेकिन, जब पैसे खर्च हुए तो एसएन की राह पकड़ी। एसएन के डॉक्टर्स ने इलाज शुरू किया और कैंसर पर काबू पाया। ऐसा ही एक मामला सिकंदरा आवास विकास सेक्टर 11 का है। वृद्ध महिला इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती रहीं लेकिन, जब पैसे खत्म हुए तो वहां से दुत्कार दिया। एसएन जाकर अपना इलाज करा रही हैं।
सरकार को सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में सुविधाओं को बढ़ाने के लिए कई बार मांग उठी है। समाजसेवी नरेश पारस ने कई बार उच्च अधिकारियों को एसएन में सुविधाएं बढ़ाने के लिए पत्र लिखे हैं। वहीं सत्यमेव जयते संस्था ने भी एसएन में सुविधाएं बढ़ाने की मांग की है।
Published on:
01 Jul 2018 10:35 am
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