
Gandhi Jayanti 2018
आगरा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की यादों को आज भी यमुना संवारे हुये है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाने और इन्हीं सिद्धांतों से भारत को 1947 में आजादी दिलाने वाले बापू को दिल्ली में 30 जनवरी 1948 को प्रार्थना सभा के लिए जाने के दौरान नाथूराम गोड्से ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। गांधी जी आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं, लेकिन आगरा की यमुना ने बापू की कई यादों को समेट कर रखा हुआ है। चाहे फिर यमुना किनारे बना वो चबूतरा हो, जहां बापू भजन करते थे, या फिर वो जगह जहां बापू का उपचार हुआ था। ये स्थान बड़ा ही रमणीक है और घूमने लायक भी है।
गांधी स्मारक यमुना किनारा
हम बात कर रहे हैं यमुना किनारे स्थित गांधी स्मारक की। एत्मादुद्दौला स्मारक के बगल में स्थित इस स्थान पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 12 दिन तक अपने स्वास्थ सुधार के लिए ठहरे थे। यहां गांधी जी की घड़ी, दो चश्मे और एक चरखा आज भी सुरक्षित है, जिसका प्रयोग उन्होंने आगरा प्रवास के दौरान किया था। इस स्मारक की देखरेख करने वाले रिटायर्ड बैंक कर्मी जगदीश यादव ने बताया कि महात्मा गांधी स्वतंत्रता आंदोलन के समय अपने वृहद जनसंपर्क अभियान के अंतर्गत 10 सितम्बर 1929 से 21 सितम्बर 1929 तक इस स्थान पर ठहरे थे। इस दौरान बापू आगरा के प्रमुख जौहरी एवं व्यवसायी रामकृष्ण मेहरा के अतिथि रहे।
2015 में हुआ जीर्णोद्धार
जगदीश यादव ने बताया कि सन् 1948 में गांधी जी के निधन के उपरांत रामकृष्ण मेहरा के पुत्र बृजमोहन दास मेहरा ने इस भवन एवं परिसर को गांधी स्मारक के लिए दान किया। मुख्य भवन मराठा शैली में निर्मित दो मंजिला भवन है। वर्षों तक नगर निगम का प्रसूति अस्पताल, जच्चा बच्चा कल्याण केन्द्र तथा आयुर्वेदिक चिकित्सालय के रूप में संचालित रहा। वर्ष 2015 में जीर्णोद्धार के उपरांत इसे गांधी स्मारक एवं संग्रहालय के रूप में पुनः जीवित किया गया। गांधी स्मारक को अब नगर निगम द्वारा संरक्षित किया गया है। इसके बाद से यहां की हरियाली और इसके साथ यमुना होने की वजह से चलने वाली शीतल हवाएं, शांत वातावरण आपको जरूर लुभाएगा।
Updated on:
27 Sept 2018 05:45 pm
Published on:
27 Sept 2018 05:45 pm
