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127 साल पहले हुई थी धर्म आधारित जनगणना, तब 95,711 हिन्दू थे और मुस्लिम…

ब्रिटिश शासन काल में 1891 में धर्म आधारित जनगणना कराई गई थी। उस समय शहर में 1723 ईसाई थे।
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आगरा

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Bhanu Pratap Singh

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Updated: 14 May 2018, 8:45 AM IST

मुस्लिम

मुस्लिम

आगरा। जनगणना का खासा महत्व है। इसी आधार पर सरकार तमाम योजनाएं बनाती है। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू करने से पूर्व जाति आधारित जनगणना कराई गई थी। क्या आपको पता है कि आगरा में धर्म आधारित जनगणना भी हो चुकी है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1891 में धर्म आधारित जनगणना हुई थी। तब आगरा में 95,711 हिन्दू थे। सर्वाधिक साक्षरता हिन्दुओं में ही थी।1873 में आगरा में जिला कारागार का निर्माण कराया गया था। जिला कारागार का द्वार आज भी प्राचीनता का द्योतक है।ॉ

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लगभग 50 फीसदी मुस्लिम थे

तवारीख-ए-आगरा पुस्तक के लेखक राजकिशोर राजे ने बताया कि धर्म आधारित जनगणना में 44,021 मुस्लिम, 1723 ईसाई और 3906 अन्य लोग थे। उस समय करीब 50 फीसदी मुस्लिम थे। वे बताते हैं कि धर्म आधारित जनगणना के पीछे अंग्रेजों का निहितार्थ छिपा हुआ था। वे यह पता लगाना चाहते थे कि किस धर्म के लोगों को अपने पक्ष में किया जा सकता है।

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1881 की जनगणना

इससे पहले 1881 में आगरा की सामान्य जनगणना कराई गई। उस समय आगरा की कुल आबादी 2,91,044 थी। इसमें मात्र 21,409 लोग साक्षर थे। इससे साफ है कि पढ़ने लिखने के प्रति लोगों का रुझान नहीं था। उनका जीवन तो परिवार के पालन-पोषण में ही निकल जाता था। तब यह माना जाता था कि पढ़ना-लिखना अमीरों का काम है। पढ़े-लिखे व्यक्ति को हैरत की नजर से देखा जाता था। जो पढ़ जाता था, उसे अंग्रेज अपने यहां नौकरी पर रख लेते थे। अंग्रेजों को ऐसे लोग चाहिए थे, जो उनके हुक्म का पालन करते रहें।

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संयुक्त प्रांत आगरा व अवध

सन 1877 में अंग्रजों ने आगरा व अवध को मिलकार संयुक्त प्रांत आगरा व अवध का गठन किया। इस प्रांत में 10 कमिश्नरी थीं। आगरा भी एक कमिश्नरी था। सन 1850 में नगर पालिका एक्ट बनाया गया। इसी एक्ट के तहत 1863 में आगरा को नगर पालिक का दर्जा दिया गया। इससे पहले आगरा में टाउन चौकीदारी एक्ट लागू था। 1894 में नगर पालिका की आय पांच लाख 20 हजार रुपये थी।

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