
राज बब्बर
डॉ. भानु प्रताप सिंह
आगरा। कहने को तो लोकसभा चुनाव है। हकीकत में युद्ध का मैदान है। युद्ध में सहयोगी आ रहे हैं। सहयोगी जा भी रहे हैं। प्रत्याशी सेनापति की तरह हैं। उनके प्रमुख कार्यकर्ता रथी की तरह हैं। बिलकुल महाभारत की तरह। 18 अप्रैल, 2019 को युद्ध होगा। इसमें हाथी है। घोड़ा है। तलवार है। रथ है। रथी हैं। हाथी और घोड़ा की जगह कार आ गई हैं। तलवार की जगह बंदूक हैं। रथी का स्थान ले लिया है बड़े कार्यकर्ताओं ने। हम बात कर रहे हैं फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र की। फतेहपुर सीकरी में 1527 में खानवा युद्ध हुआ था। अब लोकसभा में जाने के लिए युद्ध हो रहा है। यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी राज बब्बर ने भाजपा प्रत्याशी राज कुमार चाहर को चारों खाने चित करने के लिए चक्रव्यूह रचा है। राजकुमार चाहर ने भी अपनी चक्रव्यूह बनाया है। यह चक्रव्यूह त्रिस्तरीय है। इसे भेद पाना आसान नहीं है। आइए चक्रव्यूह के बारे में विस्तार से जानते हैं।
राज बब्बर का चक्रव्यूह-1
महाभारत के युद्ध में अभिमन्यु को सात द्वारों के चक्रव्यूह में फंसाया गया था। चुनावी चक्रव्यूह में राज बब्बर ने राजकुमार चाहर के लिए पांच द्वारों का चक्रव्यूह बनाया है। ये द्वार हैं- फतेहपुर सीकरी, खेरागढ़, बाह, फतेहाबाद और आगरा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र। प्रत्येक द्वार पर रथी तैनात हैं, जो ‘अभिमन्यु’ को परास्त करने में लगे हुए हैं। ये रथी शोर मचाने वाले नहीं, चुपचाप काम करने वाले हैं। फतेहपुर सीकरी में पूर्व विधायक ठाकुर सूरजपाल सिंह, खेरागढ़ में पूर्व विधायक भगवान सिंह कुशवाहा, बाह में डॉ. धर्मपाल सिंह, फतेहाबाद में पंडित केशव दीक्षित और आगरा ग्रामीण में ब्लॉक प्रमुख इंजीनियर ओमकार सिंह चाहर तैनात हैं।
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क्या कर रहे रथी
ये रथी नामी हैं। अनुभवी हैं। दो-दो बार के विधायक हैं। इन्हें नाम की कोई चाह नहीं है। आपको लग रहा होगा कि राज बब्बर के समक्ष कांग्रेस में शामिल होने के बाद ये रथी कहां चले गए? हमने जब खोजबीन की तो पता चला कि ये तो अंदर ही अंदर भाजपा की जमीन को कुतर रहे हैं। भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा रहे हैं। गांव-गांव में व्यक्ति-व्यक्ति से मिल रहे हैं। गंगाजली दिला रहे हैं। अपने सेनापति राज बब्बर के इशारे पर राजकुमार चाहर के लिए जाल बुन रहे हैं। ऐसा जाल जिसमें विरोधी फड़फड़ाए, तिलमिलाए, बिलबिलाए, लेकिन मुख पर हँसी लाए।
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राज बब्बर का चक्रव्यूह-2
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दुष्यंत शर्मा ने जिले में ब्लॉक, न्याय पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर नेटवर्क बनाया है। न्याय पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर पर प्रभारी बनाए गए हैं। उसके साथ में संयोजक भी हैं। उन्होंने हर गांव में पांच-पांच लोगों की टीम बनाई है। उन्हें बस्ता दे रहे हैं। नेटवर्क पहले से ही है। जिले में 15 ब्लॉक हैं, 695 ग्रामसभा और 15 न्याय पंचायत हैं। ब्लॉक अध्यक्ष-संयोजक के अलावा ग्राम पंचायत और न्याय पंचायत पर अध्यक्ष व संयोजक हैं। हर ग्राम पंचायत में पांच-पांच लोगों की टीम है। हमारे इस चक्रव्यूह का मुकाबाल कोई नहीं कर सकता है। न कोई इसमें घुस सकता है और न ही उसे कोई भेद सकता है।
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चाहर का चक्रव्यूह-1
ऐसा भी नहीं है कि राजकुमार चाहर ने इन द्वारों को भेदने का इंतजाम नहीं कर रखा है। बाह में विधायक रानी पक्षालिका सिंह, पूर्व विधायक राजा अरिदमन सिंह और डॉ. राजेन्द्र सिंह, फतेहाबाद में विधायक जितेन्द्र वर्मा, पूर्व विधायक छोटेलाल वर्मा, उमेश सैंथिया, पूर्व मंत्री रामसकल गुर्जर, फतेहपुर सीकरी में चौधरी उदयभान सिंह, खेरागढ़ में विधायक महेश गोयल, आगरा ग्रामीण में विधायक हेमलता दिवाकर कुशवाहा को जिम्मेदारी दी गई है। रामसकल गुर्जर और डॉ. राजेन्द्र सिंह को बाह के साथ फतेहाबाद का भी जिम्मा है। ये सभी सत्ता वाले हैं। पूरा दबदबा है। साथ में समर्थकों की फौज है।
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चाहर का चक्रव्यूह-2
भारतीय जनता पार्टी की ओर से बाह में राकेश कुशवाहा, फतेहाबाद में रामराज सिंह, आगरा ग्रामीण में गुड्डू नरवार, खेरागढ़ में अशोक लवानिया और फतेहपुर सीकरी में देवेन्द्र वर्मा को विधानसभा प्रभारी के रूप में तैनात किया गया है। इनका काम संगठन स्तर पर रचना करना है। कार्यकर्ताओं को काम में लगाए रखना है। दूसरी पार्टी के चक्रव्यूह को भेदना है। अपने वोटों की रखवाली करना है। भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम भदौरिया कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ग्लैमर में सब उड़ जाएंगे। यहां कोई फिल्मी ग्लैमर नहीं चलने वाला है। ये बाहरी लोग हैं। राजकुमार चाहर ही फतेहपुर सीकरी के राजकुमार होंगे।
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चाहर के लिए संघ का चक्रव्यूह-3
इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से भी रथी तैनात किए गए हैं। इन्हें विधानसभा प्रभारी का नाम दिया गया है। आगरा ग्रामीण में कौशल अग्रवाल, फतेहाबाद में प्रमोद शर्मा, फतेहपुर सीकरी में रणजीत सिंह, खेरागढ़ में महेश और बाह में योगेन्द्र तैनात हैं। ये सब तपेतपाए लोग हैं। अपनी जेब से पैसा खर्च करके काम कर रहे हैं। इन्हें प्रत्याशियों से कोई लेना-देना नहीं है। जहां-जहां प्रत्याशी कमजोर दिखाई देता है, वहां पहुंचकर डट जाते हैं। एक नारा लगता है कि जो हमसे टकराएगा वो चूर-चूर हो जाएगा। बिलकुल ऐसा ही है, जो संघ कार्यकर्ताओं से टकराएगा वो चूर-चूर हो जाएगा। तीसरे चक्रव्यूह के रथी सबको काबू में रखते हैं। 18 अप्रैल, 2019 को यही लोग घर-घर से अपने समर्थकों के वोटरों को निकालने का काम करेंगे। अब देखना यह है कि कौन किसके चक्रव्यूह में घुस पाता है और कौन किसे परास्त कर पाता है। सबको 23 मई, 2019 का इन्तजार रहेगा, जब मतों की गिनती होगी।
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Published on:
17 Apr 2019 01:11 pm
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