
ABVP से निकले राजनीति में शीर्ष पदों पर पहुंचे ये नेता, राष्ट्रीय अधिवेशन में दिखा ‘संगम’
आगरा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ABVP का 65वां राष्ट्रीय अधिवेशन आगरा कॉलेज के खेल मैदान पर चल रहा है। शनिवार को तीन दिवसीय अधिवेशन की विधिवत शुरुआत हुई। इस दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं का ‘संगम’ देखने को मिला। एक तरफ अधिवेशन में विद्यार्थी परिषद की युवा पीढ़ी थी तो वहीं आज भारतीय जनता पार्टी BJP में शीर्ष पदों पर पहुंच चुके पुराने विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता भी पहुंचे। इनमें अहम नाम भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह हैं।
बता दें कि सुनील बंसल उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे ताकतवर व ऐसे रणनीतिकार के तौर पर पहचाने जाते हैं जिनके प्रदेश महामंत्री (संगठन) के तौर पर कमान संभालने के बाद से भाजपा ने उत्तर प्रदेश में पीछे मुड़कर नहीं देखा। विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव, निकाय चुनाव हो या संगठनात्म चुनाव, सुनील बंसल ने हर बार चौंकाने वाले परिणाम दिए। जून 2014 में भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) की कमान संभालने वाले सुनील बंसल का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से पुराना नाता रहा है। छात्र जीवन में इन्होंने अखिल विद्यार्थी परिषद से जुड़कर राजनीति का ककहरा सीखा। 1989 में राजस्थान विश्वविद्यालय में महासचिव चुने जाने के बाद बंसल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने एबीवीपी के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री का भी दायित्व संभाला। अब भाजपा में सबसे बड़े सूबे की ‘कमान’ उन्हीं के हाथों में है।
वहीं सत्तारूढ़ दल भाजपा में प्रदेश के शीर्ष पद पर काबिज स्वतंत्रदेव सिंह का भी एबीवीपी से पुराना नाता है। स्वतंत्र देव सिंह ने राजनीति की शुरुआत छात्रसंघ चुनाव से ही की थी। स्वतंत्र देव सिंह ने पहला चुनाव जालौन के उरई स्थित डीवीसी कॉलेज से छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था। इसके बाद 1986 में आरएसएस से जुड़कर स्वयंसेवक के रूप में प्रचारक के तौर पर काम करना शुरू किया। 1988-89 तक एबीवीपी में संगठन मंत्री का दायित्व संभाला।
आज जब ये दोनों नेता एबीवीपी के राष्ट्रीय अधिवेशन में पहुंचे तो कार्यकर्ताओं से ऐसे मिलते दिखे मानो इनकी पुरानी यादें ताजा हो गई हों। एबीवीपी की आज की पीढ़ी में उनके संगठन से निकल कर प्रदेश की राजनीति में शीर्ष पदों पर पहुंचे इन नेताओं के प्रति आकर्षण था तो वहीं इन नेताओं में अपने पुराने संगठन की युवा पीढ़ी के प्रति सहज आत्मीय भाव दिखा। इस तरह अधिवेशन का पहला दिन नए-पुराने कार्यकर्ताओं के संगम का गवाह भी बना।
इनके आलावा एबीवीपी से शुरुआत करने वाले अनूप गुप्ता प्रदेश मंत्री भाजपा व आईटी प्रदेश प्रभारी, ब्रज बहादुर भाजपा पिछड़ा वर्ग और किसान मोर्चा के सह प्रभारी व हाल ही में एमएलसी की टिकिट पाने वाले मानवेंद्र सिंह भी अधिवेशन में पहुंचे।
वहीं जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह से पूछा गया कि एबीवीपी गैर राजनीतिक संगठन है लेकिन अधिवेशन में आज कहीं न कहीं राजनीतिक रंग भी दिख रहा है तो उन्होंने कहा कि ‘विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ताओं के निर्माण की मशीन है। युवाओं के अदंर राष्ट्र निर्माण की भावना जागृत करता है। चूंकि हम लोग भी पहले विद्यार्थी परिषद में रहे हैं, इसीलिए पूर्व विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता के नाते हम अधिवेशन में आए। हमें एबीवीपी से जो संस्कार मिला है वही आज भी अन्य राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं से हमें भिन्न बनाता है।‘
Updated on:
23 Nov 2019 07:33 pm
Published on:
23 Nov 2019 07:18 pm
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