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आंखों की रोशनी गई, उंगलियों ने थामी शतरंज की बिसात, अब ग्रीस में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा राहुल

सामने रखी शतरंज की बिसात राहुल वाघेला को दिखाई नहीं देती, लेकिन उसकी उंगलियां उसके हर खाने को पहचानती हैं। कौन-सी गोटी कहां रखी है, इसका अंदाजा वह स्पर्श से लगाता है और दिमाग में पूरी बिसात की तस्वीर बनाकर अगली चाल चलता है।
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राहुल वाघेला के साथ मेंटर पारितोष दवे।

ahmedabad: सामने रखी शतरंज की बिसात राहुल वाघेला को दिखाई नहीं देती, लेकिन उसकी उंगलियां उसके हर खाने को पहचानती हैं। कौन-सी गोटी कहां रखी है, इसका अंदाजा वह स्पर्श से लगाता है और दिमाग में पूरी बिसात की तस्वीर बनाकर अगली चाल चलता है। उसके लिए शतरंज आंखों से देखने का नहीं, उंगलियों और दिमाग से देखने का खेल है। वह कहते हैं कि उनकी आंखें नहीं हैं तो क्या, उंगलियां ही उनकी आंखें हैं।

जामनगर के 19 वर्षीय राहुल का चयन अब ग्रीस में होने वाली विश्व जूनियर चेस चैंपियनशिप के लिए हुआ है। इंटरनेशनल ब्रेल चेस एसोसिएशन (आइबीसीए) की ओर से 4 से 12 अक्टूबर तक होने वाली इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में विभिन्न देशों के दृष्टिबाधित खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। राहुल भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले चार खिलाड़ियों में शामिल हैं। उनके अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक का एक-एक खिलाड़ी भी भारतीय दल में है। पुणे में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता में उसके प्रदर्शन के आधार पर उसका चयन किया गया है।

बुखार ने छीनी रोशनी, हौसला नहीं

शहर के एल डी आर्ट्स कॉलेज में बीए में अध्ययनरत राहुल की दोनों आंखों की रोशनी बचपन में तेज बुखार के बाद चली गई थी। परिवार की परिस्थितियां भी आसान नहीं रहीं। तीन भाइयों में राहुल और उसका बड़ा भाई दोनों नेत्रहीन हैं। पढ़ाई में काफी होशियार बड़ा भाई किडनी की गंभीर समस्या से जूझ चुका है। उसकी मां ने अपनी किडनी देकर उसे नया जीवन दिया। माता-पिता झाड़ू बनाने का काम करते हैं, हालांकि इन परिस्थितियों के बावजूद राहुल का आत्मविश्वास कायम है। वे कहते हैं कि आंख नहीं होने पर ईश्वर से कोई शिकायत नहीं है।

बीपीए ने दिया मार्गदर्शन

राहुल पिछले कुछ वर्षों से अहमदाबाद के वस्त्रापुर स्थित ब्लाइंड पीपल एसोसिएशन (बीपीए) में रहकर पढ़ाई के साथ शतरंज की तैयारी कर रहा है। उसे पिछले पांच वर्षों से अंतरराष्ट्रीय कोच जल्पन भट्ट प्रशिक्षण दे रहे हैं। बीपीए के मेंटर पारितोष दवे भी राहुल के खेल को निखारने और उसकी प्रतिभा को सही दिशा देने में लगातार मार्गदर्शन कर रहे हैं। बीपीए के महासचिव डॉ. भूषण पुनानी ने कहा कि राहुल की प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास उसकी बड़ी ताकत है।

जयपुर में सामान्य खिलड़ियों के बीच होगा मुकाबला

इसके बाद नवंबर में जयपुर में होने वाली 50 विश्वविद्यालयों के बीच सामान्य वर्ग की शतरंज प्रतियोगिता में भी हिस्सा लेगा। इससे पहले उसने गुजरात यूनिवर्सिटी से जुड़े 50 कॉलेजों के 100 से अधिक सामान्य खिलाड़ियों के बीच हुई शतरंज प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी को मात दी।