
साबरमती आश्रम विकास योजना के तहत तैयार किया गया एक नया भवन।
Ahmedabad. शहर के 5 एकड़ में फैले साबरमती आश्रम को नए सिरे से 55 एकड़ में विकसित किया जा रहा है। ऐसे में साबरमती आश्रम से जुड़े 36 पुराने मकानों, इमारतों से निकली पुरानी लकड़ी सिर्फ विरासत का हिस्सा बनकर नहीं रहेगी, बल्कि यह देशभर में लोगों के घरों तक महात्मा गांधी की याद पहुंचाएगी।
नए साबरमती आश्रम में आने वाले लोगों को आश्रम की इसी पुरानी लकड़ी से तैयार की गईं कई यादगार वस्तुएं खरीदने का विकल्प मिलेगा। इनमें महात्मा गांधी की छोटी प्रतिकृति, उनके तीन बंदर, चाबी का छल्ला, फोटो फ्रेम, आश्रम का मॉडल सहित कई निशानियां शामिल हैं। इन यादगार वस्तुओं को डिजाइन करने की जिम्मेदारी शहर स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआइडी) संभाल रहा है। इसके लिए एनआइडी और महात्मा गांधी साबरमती आश्रम मेमोरियल ट्रस्ट (एमजीएसएएमटी) के बीच एक समझौता भी हुआ है। समझौते के तहत एनआइडी आश्रम के संग्रहालय की अंतिम डिजाइन और सामग्री की समीक्षा के साथ पूरे आश्रम के स्वरूप और अनुभव को लेकर भी डिजाइन सलाह देगा।
इस प्रोजेक्ट से जुड़े एनआइडी के प्रोफेसर प्रवीण सोलंकी बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आश्रम के पुराने मकानों से निकलने वाली लकड़ी के फेंकने की जगह उसका बेहतर उपयोग करने का निर्देश दिया था। ऐसे में पुरानी लकड़ी से गांधीजी, गांधी आश्रम से जुड़ी यादगार वस्तुओं को बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि आश्रम आने वाला व्यक्ति यहां से कोई ऐसी निशानी भी अपने साथ ले जा सके, जो उसे गांधीजी और उनके विचारों से जोड़े रखे। इसमें आश्रम के पुराने मकानों से निकली साग की लकड़ी से बनी निशानियां डिजाइन की जा रही हैं। जिस पर यह भी लिखा होगा कि यह निशानी आश्रम की लकड़ी से बनी है। इसमें फोटो फ्रेम, गांधी की प्रतिकृतियां, मूर्ति, चाबी के छल्ले व अन्य शामिल हैं।
सोलंकी ने बताया कि नए साबरमती आश्रम के विकास में सादगी और गांधीजी के विचारों से जुड़ाव को प्रमुखता दी जा रही है। परिसर में महात्मा गांधी का म्यूजियम भी तैयार किया जा रहा है। एनआइडी संग्रहालय की डिजाइन, आश्रम के समग्र स्वरूप और आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने में सहयोग करेगा।
एनआइडी, महात्मा गांधी साबरमती आश्रम मेमोरियल ट्रस्ट का विशिष्ट लोगो भी तैयार करेगा। गांधीजी के जीवन, मूल्यों और साबरमती आश्रम तथा गुजरात से उनके जुड़ाव से प्रेरित स्मृति वस्तुओं की एक पूरी श्रृंखला तैयार करने की योजना है। जिसका उद्देश्य डिजाइन, विरासत संरक्षण, शोध, शिक्षा और नवाचार को एक साथ जोड़ना है, ताकि साबरमती आश्रम केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि गांधीजी के विचारों से नई पीढ़ी को जोड़ने वाली जीवंत संस्था के रूप में विकसित हो सके। सोलंकी ने बताया कि आश्रम में गांधी संग्रहालय को ऐसे तैयार करने पर काम हो रहा है कि एक जगह से प्रवेश किया तो पूरे आश्रम को देखे बिना आप रह नहीं पाएंगे। इसमें गांधी के पूरे जीवन को समाहित किया है। बेहतर अनुभव, शिक्षा, जुड़ाव, मनोरंजन, ग्राफिक्स, मूवी, एनीमेशन, मूर्तियां भी होंगी।
Updated on:
02 Oct 2026 09:13 pm
Published on:
02 Oct 2026 09:13 pm
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