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अजमेर रेल मंडल में फर्जीवाड़े का खुलासा: लेवल-2 के कर्मचारी को बनाया प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर, रेलवे में यह पदनाम ही नहीं

अजमेर रेल मंडल में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। यहां लेवल-2 के कर्मचारी को प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर बना दिया गया, जबकि रेलवे में यह पदनाम है ही नहीं।
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अजमेर

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Arvind Rao

•

Oct 08, 2026

ajmer railway division

Ajmer Railway Division (Patrika File Photo)

अजमेर: उत्तर-पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल कार्यालय में लेवल-2 कर्मचारी को 'पदनाम' बदलकर सुविधाएं और अनियमित भुगतान देने का मामला सामने आया है। इस बाबत एक निजी व्यक्ति ने पोर्टल के जरिए केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को शिकायत भेजी है। शिकायत में नियम विरुद्ध लगाए गए तकनीकी कार्मिक के एचआरएमएस रिकॉर्ड, सर्विस बुक, ड्यूटी पास, भुगतान संबंधी दस्तावेज और वीआईपी कोटा आवंटन की जांच के मुद्दे उठाए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि रेलवे के संस्थापन, सेवा और नियुक्ति नियमों में 'प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर' का कोई पदनाम ही अधिसूचित नहीं है।

शिकायत में कई मुद्दे गिनाए

मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग, दिल्ली को अलखनंदा कॉलोनी निवासी सर्वेश्वर तिवारी द्वारा भेजी गई शिकायत में पद-परिवर्तन का कारण, यूजर आईडी, मेकर-चेकर व मंजूरी का रिकॉर्ड, तैनाती का आदेश, स्वीकृत पद, सर्विस रिकॉर्ड और इस पद के एवज में संबंधित कार्मिक को दी गई अन्य सुविधाओं, भत्तों और भुगतान तथा निजी यात्रा के दौरान ड्यूटी पास में 'ऑन ड्यूटी' दर्शाने की जांच की मांग की गई है।

'प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर' का पदनाम ही नहीं

जानकारों के अनुसार रेलवे में 'प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर' का कोई पदनाम ही नहीं है। इसके बावजूद लेवल-2 के कर्मचारी को यह पदनाम देकर काम करवाया जा रहा है। हालांकि रेलवे में 'इंस्पेक्टर' पदनाम वाले कुछ अन्य पद हैं, जो लेवल-6 से शुरू होते हैं।

ट्रैकमैन पर मंडल प्रशासन मेहरबान

शिकायत के अनुसार उत्तर-पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल कार्यालय में ट्रैकमैन-III/टेक्नीशियन-III श्रेणी में पे मैट्रिक्स लेवल-2 के कर्मचारी को एचआरएमएस (ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम-मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली) में 'प्रोटोकॉल इंस्पेक्टर' के पद पर बताते हुए 'प्रोटोकॉल टू डीआरएम' व सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी दे दी गई।

एनएचए-टीए भुगतान की भी हो जांच

शिकायत में कर्मचारी को मिले एनएचए और यात्रा भत्ते का ऑडिट, ड्यूटी रोस्टर, अवकाश दिवस की ड्यूटी, उपस्थिति, दौरे का कार्यक्रम, आवाजाही का प्रमाण-पत्र और भुगतान स्वीकृति में भी अनियमितता की आशंका जताते हुए इन्हें जांच में शामिल करने का आग्रह किया गया है। इसी तरह 'प्रोटोकॉल टू डीआरएम' के जरिए जारी हुए रिजर्वेशन कोटा आदि को भी जांच में शामिल करने का अनुरोध किया गया है।

इनका कहना है…

आवश्यकतानुसार पोस्ट बना दी जाती है, लेकिन जिस भी कर्मचारी को कार्यवाहक लगाया जाता है, उसके वेतनमान, भत्तों या अन्य सुविधाओं में कोई बदलाव नहीं होता। अजमेर में ऐसा कोई मामला है तो रेलवे की ओर से संज्ञान में लेकर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
-मिहिर देव, सीनियर डीजीएम, एनडब्ल्यूआर-जयपुर